रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी
महराजगंज जनपद के अशासकीय सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में कथित रूप से हुए लिपिक भर्ती घोटाले ने अब तूल पकड़ लिया है। शिकायत के आधार पर शिक्षा निदेशालय, उत्तर प्रदेश ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को तलब कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
पूरा मामला किसान आदर्श इंटर कॉलेज बेलवा सिसवा, महराजगंज इंटर कॉलेज तथा मोतीराम द्विवेदी जनता इंटर कॉलेज आनंदनगर फरेंदा से जुड़ा हुआ है, जहां आरोप है कि लिपिक संवर्ग की नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। शिकायतकर्ता द्वारा आरोप लगाया गया है कि न्यूनतम शैक्षिक योग्यता पूरी न करने वाले अभ्यर्थियों को नियमों के विरुद्ध नियुक्त कर दिया गया, जबकि कई नियुक्तियां विभागीय सगे-संबंधियों और करीबी लोगों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गईं।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि नियुक्तियों के शैक्षिक अभिलेखों का विधिवत सत्यापन किए बिना ही वेतन भुगतान के आदेश भी जारी कर दिए गए। इससे न केवल शासनादेशों की अवहेलना हुई, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका भी गहरा गई है।
शिक्षा निदेशालय के अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 16 के अंतर्गत बने विनियम 100 एवं 101 के अनुसार वर्ष 2020 से अब तक हुई सभी लिपिक नियुक्तियों की जांच की जाए। साथ ही संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं।
निदेशालय ने शिकायतकर्ता से भी कहा है कि वह अपने आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य एवं अभिलेख प्रस्तुत करें, जिससे जांच को निष्पक्ष और प्रमाणिक बनाया जा सके।
इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला बड़े स्तर के भर्ती घोटाले के रूप में सामने आ सकता है, जिसमें कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
फिलहाल पूरे मामले पर सबकी निगाहें टिकी हैं और महराजगंज का यह कथित भर्ती घोटाला प्रदेश स्तर पर एक बड़ा उदाहरण बन सकता है।