रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी
नई दिल्ली/प्रयागराज। प्रबंधन समिति (Committee of Management) को बड़ा झटका देते हुए भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी (Special Leave Petition) संख्या 21077/2026 को खारिज कर दिया है। यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के 17 अप्रैल 2026 के आदेश के खिलाफ दाखिल की गई थी।
मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की द्वैध पीठ, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन द्वारा की गई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने एवं अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई उचित आधार नहीं है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिका में ऐसा कोई ठोस कारण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे उच्च न्यायालय के निर्णय को पलटा जा सके। इसी के साथ विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज करते हुए कोर्ट ने इससे संबंधित सभी लंबित प्रार्थना पत्रों (Interlocutory Applications) को भी निस्तारित कर दिया।

गौरतलब है कि यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका संख्या 14483/2026 के तहत विचाराधीन था, जिसमें पारित आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद अब हाईकोर्ट का निर्णय यथावत लागू रहेगा।
इस निर्णय को संबंधित प्रबंधन समिति के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, वहीं राज्य सरकार एवं अन्य पक्षों के लिए यह राहत भरी खबर है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसएलपी खारिज किए जाने का अर्थ है कि अब इस मामले में उच्च न्यायालय का आदेश अंतिम रूप से प्रभावी रहेगा।