रिपोर्ट – रविन्द्र मिश्र, ब्यूरो महराजगंज
उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद में तहसील प्रशासन और उप जिलाधिकारी सदर पर गंभीर आरोप लगे हैं। ग्राम मथनियां, तहसील सदर निवासी उमा शंकर प्रसाद ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर कहा है कि उनके पिता के नाम से लगभग 35 वर्ष पूर्व पट्टे की भूमि को खारिज किए जाने के बाद भी बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के 7 जनवरी 2026 को उक्त भूमि पर बुलडोज़र चलवा दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि यह कार्रवाई माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के विपरीत है।

शिकायत के अनुसार, जब पीड़ित ने 9 जनवरी 2026 को उच्च अधिकारियों से विधिक कार्रवाई की मांग की, तो इससे खिन्न होकर उप जिलाधिकारी सदर और तहसील प्रशासन ने कथित तौर पर पीड़ित और उसके परिवार को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पीड़ित ने आशंका जताई है कि उसे और उसके परिजनों को फर्जी मुकदमों में फंसाने की साजिश भी रची जा रही है। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

पीड़ित पक्ष का यह भी कहना है कि यह कोई नई घटना नहीं है। इससे पूर्व भी जिला और तहसील प्रशासन पर मनमाने रवैये के आरोप लगते रहे हैं। इसी कड़ी में एक पुराने प्रकरण का हवाला दिया गया, जिसमें प्रशासनिक उपेक्षा और अधिकारियों की संवेदनहीनता से तंग आकर दलित समाज की एक युवती सीमा गौतम ने राष्ट्रपति से ‘इच्छा मृत्यु’ की मांग तक कर डाली थी। उस मामले में संपत्ति विवाद, फर्जी दस्तावेज़, कथित भ्रष्टाचार, पुलिस जांच में लापरवाही और पीड़ित परिवार को लगातार धमकाने जैसे आरोप सामने आए थे।

सीमा गौतम के प्रकरण में आरोप था कि नाबालिगों की संपत्ति का फर्जी तरीके से हस्तांतरण कराया गया, हत्या के मामले में देर से एफआईआर दर्ज हुई और बाद में पुलिस जांच पर भी सवाल उठे। पीड़ित परिवार ने आर्थिक तंगी, सामाजिक अपमान और न्याय न मिलने की बात कहते हुए प्रशासन से अंतिम गुहार लगाई थी।
अब महराजगंज के ताजा मामले में भी प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता और विधिसम्मत प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि पीड़ितों को डराने-धमकाने के बजाय निष्पक्ष जांच और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, बहुजन स्वाभिमान संघ सहित कई संगठनों ने संघर्ष जारी रखने और न्यायिक मार्ग से लड़ाई लड़ने का आह्वान किया है।
प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामला संवेदनशील होने के चलते उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज होती जा रही है।