NMMS ऐप में बड़ा फर्जीवाड़ा: एक ही फोटो से कई दिन की हाजिरी, बलिया में मनरेगा घोटाले की खुली पोल

रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी 

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लखनऊ/बलिया। उत्तर प्रदेश में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत डिजिटल पारदर्शिता के नाम पर लागू किए गए NMMS (नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम) ऐप में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। राज्य स्तर की आकस्मिक जांच में सामने आया है कि जनपद बलिया की कई ग्राम पंचायतों में 03 और 04 जून 2026 की हाजिरी के लिए एक ही फोटो का इस्तेमाल किया गया है।

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जांच में पाया गया कि अलग-अलग तिथियों की उपस्थिति दर्ज करने के बावजूद अपलोड की गई तस्वीरें पूरी तरह समान हैं—चेहरे के हावभाव, पृष्ठभूमि और स्थिति तक में कोई अंतर नहीं। यह स्पष्ट संकेत है कि NMMS ऐप के जरिए फर्जी उपस्थिति दर्ज करने के लिए किसी क्लोन या अनधिकृत एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया गया है। मामला सामने आने के बाद शासन स्तर पर हड़कंप मच गया है।

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ग्राम्य विकास विभाग के संयुक्त आयुक्त संजय कुमार पांडेय ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जिन मोबाइल डिवाइस से ये संदिग्ध फोटो अपलोड हुई हैं, उन्हें तत्काल जब्त कर तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही संदिग्ध मस्टर रोल की पूरी अवधि, उसके पहले और बाद के दिनों की सभी तस्वीरों की गहन जांच करने को कहा गया है।

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यही नहीं, मौके पर टीम गठित कर कार्यों का स्थलीय सत्यापन कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। यदि जांच में फर्जीवाड़ा साबित होता है तो दोषी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

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चौंकाने वाली बात यह भी है कि शासन ने आशंका जताई है कि यह गड़बड़ी सिर्फ बलिया तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि अन्य विकास खंडों और ग्राम पंचायतों में भी इस तरह की धांधली चल रही हो सकती है। इसके पीछे स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों की मिलीभगत से वित्तीय अनियमितताओं की संभावना भी जताई गई है।

अब पूरे प्रदेश में NMMS ऐप के जरिए हो रहे कार्यों की रैंडम जांच के आदेश दे दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को तीन दिन के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) राज्य मुख्यालय को भेजने का निर्देश दिया गया है।

डिजिटल सिस्टम को भी चकमा देकर मनरेगा में फर्जीवाड़ा करने का यह मामला न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि गरीब मजदूरों के हक पर डाका डालने की साजिश को भी उजागर करता है।

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