रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

महराजगंज जनपद में प्रशासनिक कार्यवाही को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां मा० उच्च न्यायालय इलाहाबाद के स्पष्ट स्थगन आदेश के बावजूद एक दलित किसान को उसकी जमीन से बेदखल किए जाने का आरोप लगा है। ग्राम सभा मथनिया निवासी सुरेश पुत्र स्वर्गीय मोहर ने आयुक्त गोरखपुर मंडल को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।

प्रार्थी के अनुसार, उसे वर्ष 1987 में गाटा संख्या 562, रकबा 0.0770 हेक्टेयर भूमि कृषि कार्य हेतु आवंटित की गई थी, जिस पर वह लगातार खेती करता आ रहा था। किन्तु पूर्व में जिलाधिकारी एवं आयुक्त स्तर से उसका पट्टा निरस्त कर दिया गया, जिसके विरुद्ध उसने मा० उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट याचिका संख्या 2012/2026 दायर की। इस पर न्यायालय ने 6 फरवरी 2026 एवं 24 मार्च 2026 को आदेश पारित करते हुए पक्षकारों को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे।

इसके बावजूद आरोप है कि 13 जून 2026 को जब सुरेश अपने खेत में रोपाई कर रहा था, तभी उपजिलाधिकारी सदर के निर्देश पर राजस्व टीम और पुलिस मौके पर पहुंची और जबरन कार्य रुकवा दिया। प्रार्थी का आरोप है कि एसडीएम द्वारा न केवल खेत में जाने से रोका गया, बल्कि जेल भेजने की धमकी भी दी गई।
इस प्रकरण में उपजिलाधिकारी सदर जितेंद्र कुमार, तहसीलदार पंकज शाही, कानूनगो विजय तिवारी और लेखपाल अनूप पाल पर न्यायालय के आदेश की अवहेलना कर बेदखली कराने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने आयुक्त से निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
अब यह मामला प्रशासनिक कार्यशैली और न्यायालय के आदेशों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।