महराजगंज | मदरसा VRS महाघोटाला | एक्सपोज़े
नियमावली 2016 को रौंदकर भाई की नियुक्ति, शिक्षा माफिया नेटवर्क बेनकाब
ब्यूरो महराजगंज – रविन्द्र मिश्रा
मिरसिकारी टोला अजमत नगर स्थित मदरसा अजीजिया इशातुल उलूम अब शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि नियमविहीन नियुक्तियों और फर्जी VRS प्रयोग का प्रतीक बनता जा रहा है। मदरसा नियमावली 2016 में जिस VRS (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति) का कोई कानूनी अस्तित्व ही नहीं, उसी फर्जी आधार पर चार शिक्षकों को हटाकर अपने लोगों की नियुक्ति कराने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे षड्यंत्र की धुरी कुशीनगर निवासी जुल्फिकार अली सिद्दीकी है, जिसे लोग Z.A. सिद्दीकी / सिद्दीकी साहब के नाम से जानते हैं। आरोप है कि जुल्फिकार अली सिद्दीकी ने अपने सगे भाई किस्मत अली सिद्दीकी को मदरसा अजीजिया इशातुल उलूम में शिक्षक बनवाने के लिए महराजगंज में पहली बार फर्जी VRS मॉडल का प्रयोग कराया। यही नहीं, तीन अन्य शिक्षकों को भी कथित तौर पर कागजों पर VRS दिखाकर बाहर कर दिया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि—

जब मदरसा नियमावली 2016 में VRS का कोई प्रावधान ही नहीं है, तो यह VRS आया कहां से?
किस आदेश पर? किस फाइल से? किस अधिकारी की अनुमति से?
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे खेल में मदरसे के प्रबंधक अंजुम कादरी, अध्यक्ष बिलाल, प्रधानाचार्य अताउद्दीन और तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी नीरज कुमार अग्रवाल की भूमिका संदिग्ध नहीं बल्कि निर्णायक रही। आरोप है कि इन सभी की मिलीभगत से मदरसा अजीजिया को VRS का प्रयोगशाला बना दिया गया।

यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी जुल्फिकार अली सिद्दीकी पर कुशीनगर जिले के रामकोला थाना क्षेत्र के धनौजी बाजार स्थित मदरसे में अपने एक भाई की नियुक्ति कराने का आरोप लगा था। उस मदरसे पर बाद में सरकारी ताला लगा और जांच में वित्तीय, शैक्षणिक और प्रशासनिक अनियमितताओं की लंबी सूची सामने आई थी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जुल्फिकार अली सिद्दीकी पूर्वांचल के मदरसों में जानबूझकर विवाद पैदा करता है, फिर किसी एक गुट की कमेटी के साथ खड़ा होकर खुद को “समाधानकर्ता” बताता है और बदले में अपने रिश्तेदारों व करीबी लोगों की नियुक्तियां करवा देता है। इसी कारण मदरसा जगत में उसे शिक्षा माफिया का चेहरा कहा जाने लगा है।
सूत्र यहां तक दावा कर रहे हैं कि जुल्फिकार अली सिद्दीकी की पहुंच ऊंचे स्तर के अधिकारियों और प्रभावशाली शिक्षा माफियाओं तक है। यदि उसकी मोबाइल कॉल डिटेल, व्हाट्सऐप संपर्क, बैंक लेन-देन और नियुक्ति फाइलों की निष्पक्ष जांच हो जाए, तो इस पूरे VRS खेल में शामिल कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
यह मामला सिर्फ एक मदरसे का नहीं, बल्कि पूरी मदरसा शिक्षा प्रणाली की साख से जुड़ा है। अब सवाल यह है कि—
क्या शासन इस फर्जी VRS मॉडल की राज्यस्तरीय जांच कराएगा?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?