रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी
महराजगंज। उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद कई मामलों में स्थानीय स्तर पर कार्रवाई न होने के कारण शिकायतें उच्च संस्थाओं तक पहुंच रही हैं। ऐसा ही एक मामला जनपद महराजगंज से सामने आया है, जहां ग्राम पंचायत स्तर पर कथित भ्रष्टाचार और शासकीय धन के दुर्विनियोग के आरोपों की जांच अब लोकायुक्त के निर्देश पर होने जा रही है।

उप लोक आयुक्त कार्यालय, उत्तर प्रदेश, लखनऊ से जारी पत्र के अनुसार परिवादी श्री दयानन्द सिंह पुत्र श्री बंगाली सिंह, निवासी ग्राम बरवां राजा टोला, बरईपट्टी पोस्ट नदुआ, थाना कोतवाली महराजगंज द्वारा ग्राम प्रधान समेत अन्य संबंधित पक्षों पर भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया गया है। शिकायत का संज्ञान लेते हुए उप लोक आयुक्त कार्यालय की सचिव डॉ. रीमा बंसल द्वारा जिलाधिकारी महराजगंज को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विधिसंगत जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
पत्र में जिलाधिकारी को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि आरोपों की तथ्यात्मक जांच कर यह बताया जाए कि क्या आरोपित पक्षों द्वारा कूटरचित अभिलेख तैयार कर शासकीय धन का दुरुपयोग अपने निजी लाभ के लिए किया गया है और इससे शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है या नहीं। यदि जांच में ऐसे तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि आरोपितों ने अपने कृत्यों के माध्यम से कोई संज्ञेय अपराध किया है तो उनके विरुद्ध दण्ड प्रक्रिया संहिता अथवा अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत वैधानिक कार्रवाई जिलाधिकारी द्वारा सुनिश्चित की जाए। साथ ही पूरे प्रकरण में की गई कार्रवाई की विस्तृत आख्या 23 अप्रैल 2026 तक लोकायुक्त कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
लोकायुक्त कार्यालय ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि उत्तर प्रदेश शासन की नीति भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की है और इसका पालन जनपद स्तर पर पूरी निष्पक्षता और ईमानदारी के साथ सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि सामान्यतः ग्राम पंचायत स्तर के भ्रष्टाचार के मामलों की जांच ब्लॉक या जिला प्रशासन द्वारा की जाती है, लेकिन इस मामले में शिकायत सीधे लोकायुक्त तक पहुंचना यह दर्शाता है कि शिकायतकर्ता को स्थानीय स्तर पर न्याय मिलने की उम्मीद कम नजर आई। अब लोकायुक्त के निर्देश पर जिलाधिकारी द्वारा कराई जाने वाली जांच पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाती है तो ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकता है। हालांकि यह भी देखना होगा कि जांच के बाद वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला औपचारिक जांच तक ही सीमित रह जाता है।