NMMS ऐप में फर्जी हाजिरी का खेल उजागर: पार्टावल के बरहरा बरईपार में दो कार्यों पर 154 मजदूरों की एंट्री, जमीनी हकीकत नदारद

महराजगंज।
जनपद महराजगंज के पार्टावल ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बरहरा बरईपार में मनरेगा कार्यों की ऑनलाइन हाजिरी (NMMS ऐप) में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। 12 जनवरी 2026 को एक ही दिन में दो अलग–अलग कार्य स्थलों पर कुल 154 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि मौके पर न तो उतनी संख्या में श्रमिक मौजूद थे और न ही कार्य की प्रगति उसके अनुरूप दिखी।

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पहला कार्य “बरहरा बरईपार नकहवा कब्रिस्तान से ड्रेन तक मिट्टी कार्य” (कार्य कोड: 3152010009/RC/958486255823708711)

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में मास्टर रोल संख्या 5162 से 5169 तक कुल 8 मास्टर रोल दर्शाए गए, जिनमें प्रत्येक में 10-10 मजदूरों की हाजिरी दिखाई गई। इस कार्य में केवल एक ही समय की ग्रुप फोटो अपलोड की गई, जबकि नियमानुसार दो समय (प्रारंभ व समाप्ति) की फोटो अनिवार्य होती है। हैरानी की बात यह है कि दूसरी फोटो अपलोड ही नहीं की गई, फिर भी पूर्ण हाजिरी दर्ज कर दी गई।

दूसरा कार्य “बरहरा बरईपार में मरुआ टोला से बरहरा नहर तक संपर्क मार्ग पर मिट्टी कार्य” (कार्य कोड: 3152010/RC/958486255823704169) में

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मास्टर रोल संख्या 5188 से 5195 तक कुल 8 मास्टर रोल लगाए गए। इस कार्य में दोनों समय की फोटो अपलोड की गई, लेकिन मौके पर श्रमिकों की संख्या बेहद कम थी। इसके बावजूद पूर्ण 80 मजदूरों की उपस्थिति NMMS ऐप पर दर्ज कर दी गई।

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इस पूरे मामले में जब ग्राम प्रधान से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनका ऑपरेशन हुआ है और उन्हें कार्यों की कोई जानकारी नहीं है। वहीं रोजगार सेवक ने साफ कहा कि ग्राम पंचायत से कार्य बंद है, जो भी हो रहा है वह क्षेत्र पंचायत स्तर से हो रहा है, इसलिए जिम्मेदारी भी वहीं की है। दूसरी ओर ग्राम प्रधान ने यह भी दावा किया कि उक्त कार्य श्याम तिवारी नामक एक पत्रकार द्वारा कराया जा रहा है और सारी जिम्मेदारी उसी की है।

सबसे गंभीर पहलू यह है कि न तो प्रधान और न ही रोजगार सेवक मजदूरों की वास्तविक संख्या स्पष्ट रूप से बता पा रहे हैं। जमीनी सच्चाई यह है कि जहां कुछ ही मजदूर काम करते दिखे, वहीं कागजों में 154 मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका गहराती जा रही है।

यह मामला अब प्रशासनिक जांच और सोशल ऑडिट की मांग करता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि NMMS ऐप का उपयोग निगरानी के लिए हो रहा है या फिर फर्जीवाड़े को वैध बनाने के लिए।

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