सवालों के घेरे में सांसद निधि: आखिर कौन हैं रमेश चंद्र पटेल, जिन पर पंकज चौधरी ने बार-बार लुटाई करोड़ों की MP LAD निधि?

रिपोर्ट – मनोज कुमार तिवारी संपादक पर्दा फाश न्यूज 

महराजगंज।
जनपद महराजगंज में सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MP LAD Scheme) के तहत हुए खर्चों की सूची पर नज़र डालें तो एक नाम बार-बार सामने आता है—एमएस रमेश चंद्र पटेल। सड़क, पुलिया, नाला, संपर्क मार्ग, स्कूल-कॉलेज भवन और सामुदायिक भवन निर्माण जैसे दर्जनों कार्यों में लगातार एक ही वेंडर/कार्यदायी संस्था को भुगतान किया गया है। सवाल यह नहीं कि कार्य हुए या नहीं, बल्कि यह है कि आखिर एक ही व्यक्ति या फर्म पर इतनी मेहरबानी क्यों?

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उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, महराजगंज लोकसभा क्षेत्र से सांसद पंकज चौधरी (17वीं लोकसभा) द्वारा वर्ष 2024 से 2026 के बीच सांसद निधि से करोड़ों रुपये की धनराशि अलग-अलग तिथियों पर एमएस रमेश चंद्र पटेल के नाम स्वीकृत व भुगतान की गई। लगभग हर प्रविष्टि में कार्यदायी संस्था के रूप में रमेश चंद्र पटेल का नाम, IDA: District Magistrate Mahrajganj और भुगतान स्थिति “Payment Success” दर्ज है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कार्य प्रकृति लगभग एक जैसी है—

सड़क, संपर्क मार्ग, रास्ता निर्माण

पुलिया व छोटे पुलों का निर्माण

स्कूल व कॉलेजों में कक्ष और हॉल निर्माण

सामुदायिक भवनों में अतिरिक्त कमरे

अलग-अलग गांव, अलग-अलग तिथियां, लेकिन वेंडर वही। कई मामलों में एक ही माह में 10 से 20 लाख रुपये तक के भुगतान दर्ज हैं। उदाहरण के तौर पर—

04 मार्च 2025 को ₹17.25 लाख

26 मार्च 2025 को ₹13.25 लाख

26 अप्रैल 2025 को ₹5.53 लाख

30 जून 2025 को ₹8.47 लाख

01 जनवरी 2026 को ₹18.60 लाख

ऐसी दर्जनों एंट्रियां हैं, जिनमें कुल राशि कई करोड़ रुपये तक पहुंचती है।

यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या महराजगंज में केवल एक ही ठेकेदार/वेंडर सक्षम है?
क्या टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी थी?
क्या अन्य स्थानीय ठेकेदारों को अवसर मिला?
और क्या कार्यों की भौतिक जांच, गुणवत्ता परीक्षण और सोशल ऑडिट समय से हुआ?

स्थानीय जानकारों का कहना है कि कई स्थानों पर कार्य की गुणवत्ता को लेकर पहले से शिकायतें रही हैं—कहीं सड़क उखड़ गई, कहीं मिट्टी कार्य कागजों में पूरा दिखा, कहीं पुलिया नाम मात्र की बनी। इसके बावजूद भुगतान निर्बाध चलता रहा, जो प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल खड़े करता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि लगभग हर भुगतान में District Magistrate Mahrajganj (IDA) का नाम अंकित है, यानी प्रशासनिक स्वीकृति हर बार दी गई। ऐसे में यह सवाल और गहरा हो जाता है कि क्या प्रशासन ने कभी यह जांच की कि एक ही वेंडर को बार-बार काम क्यों दिया जा रहा है?

जनता के बीच अब यह चर्चा आम है कि “सांसद निधि विकास का साधन है या चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने का माध्यम?”
यदि सभी प्रक्रियाएं सही हैं तो प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि रमेश चंद्र पटेल को ही अधिकांश कार्य क्यों मिले।

फिलहाल, यह मामला केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और जनधन के उपयोग का है। अब निगाहें शासन, प्रशासन और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं—क्या इस ‘एक नाम, अनेक भुगतान’ के रहस्य से कभी पर्दा उठेगा?

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