क्या सहकारिता विभाग में “संरक्षण तंत्र” के चलते फल-फूल रहा है भ्रष्टाचार?

रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी 

महराजगंज में 8 वर्षों से जमे अफसर पर लगे गंभीर आरोप, मुख्य सचिव से जांच की मांग

उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के दावों के बीच जनपद महराजगंज से एक गंभीर मामला सामने आया है। एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा सीधे प्रदेश के मुख्य सचिव को भेजे गए शिकायती पत्र ने सहकारिता विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायत के अनुसार,  अभिषेक यादव, जो वर्तमान में जिला प्रबंधक पीसीयू, सचिव केंद्रीय उपभोक्ता भंडार एवं सचिव डीसीएफ, महराजगंज के पद पर कार्यरत हैं, बीते लगभग आठ वर्षों से एक ही जनपद में तैनात हैं। आरोप है कि स्थानांतरण नीति–2025 के बावजूद उनका तबादला नहीं किया गया, क्योंकि उन्हें लखनऊ स्तर से संरक्षण प्राप्त है।

प्रार्थी मनोज कुमार तिवारी का कहना है कि उक्त अधिकारी द्वारा बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं और भ्रष्टाचार किए जा रहे हैं, लेकिन प्रभावशाली संरक्षण के कारण न तो विभागीय जांच होती है और न ही प्रशासनिक कार्रवाई। यही कारण है कि शासनादेशों को दरकिनार कर उन्हें लगातार महराजगंज में बनाए रखा गया है।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रार्थी पूर्व में भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों को लेकर उच्च न्यायालय इलाहाबाद में जनहित याचिकाएं दायर कर चुके हैं। ऐसे में यह पत्र केवल व्यक्तिगत आरोप नहीं, बल्कि एक सतत सामाजिक संघर्ष का हिस्सा बताया जा रहा है।

सबसे अहम सवाल यह है कि यदि सरकार की स्थानांतरण नीति पारदर्शिता और भ्रष्टाचार रोकने के लिए बनाई गई है, तो फिर एक अधिकारी को आठ वर्षों तक एक ही जिले में कैसे तैनात रखा गया? क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है या फिर जानबूझकर दिया गया संरक्षण?

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शिकायत सीधे मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश को संबोधित है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। प्रार्थी ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

यदि समय रहते इस मामले में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह न केवल सहकारिता विभाग की साख पर प्रश्नचिह्न लगाएगा, बल्कि सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति को भी कमजोर करेगा। अब देखना यह है कि शासन स्तर पर इस “संरक्षण बनाम भ्रष्टाचार” के आरोपों को कितनी गंभीरता से लिया जाता है।

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