गोरखपुर में भूमि घोटाले की जांच लटकी: एसआईआर का बहाना बनाकर टालमटोल का आरोप

रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी 

गोरखपुर मण्डल में भूमि क्रय-विक्रय से जुड़े एक कथित भ्रष्टाचार प्रकरण की जांच लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी है। के०डी०एस० एसोसिएट के जरिये प्रो० श्रीमती निर्मला देवी पत्नी अविनाश चौरसिया, निवासी बशारतपुर, पूर्वी शिवपुरम, तहसील सदर, जनपद गोरखपुर पर भूमि खरीद-फरोख्त में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। इस संबंध में सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार मनोज कुमार तिवारी द्वारा दिनांक 17 अक्टूबर 2025 और 18 नवंबर 2025 को शपथ पत्र सहित जिलाधिकारी गोरखपुर के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी, लेकिन चार माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। आरोप है कि भूमि के क्रय-विक्रय में नियमों की अनदेखी कर राजस्व अभिलेखों में हेरफेर किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच चकबंदी कार्यालय, गोरखपुर को सौंपी गई, परंतु वहां भी जांच लंबित पड़ी है।

जब संबंधित जांच अधिकारी से प्रगति के बारे में जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि वे “एसआईआर कार्य” में व्यस्त हैं, जिसके कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पिछले कई सप्ताह से यही जवाब दिया जा रहा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि मामले को जानबूझकर टाला जा रहा है। उनका कहना है कि यदि जांच में देरी इसी प्रकार होती रही तो साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब जिलाधिकारी स्तर पर शिकायत प्रस्तुत की जा चुकी है, तो अब तक जांच की प्रगति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करते हुए शिकायतकर्ता ने आयुक्त, गोरखपुर मण्डल से हस्तक्षेप कर त्वरित एवं निष्पक्ष जांच के आदेश देने की अपील की है।

स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि भूमि संबंधी मामलों में यदि समय रहते कार्रवाई न हो तो विवाद और जटिल हो जाते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है और जांच को अंजाम तक पहुंचाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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