रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

महराजगंज में शिक्षा विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, वरिष्ठता दरकिनार कर मनमानी नियुक्तियों का मामला गरमाया
जनपद महराजगंज में शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप कुमार शर्मा पर लगातार भ्रष्टाचार और मनमानी के आरोप लग रहे हैं। ताजा मामला इंटर कॉलेजों में कार्यवाहक प्रधानाचार्य की नियुक्तियों से जुड़ा है, जहां वरिष्ठता के नियमों को नजरअंदाज कर कथित रूप से मनचाहे व्यक्तियों को पद दिया जा रहा है।
इस संबंध में दो अलग-अलग शिकायतें सामने आई हैं, जिनसे पूरे मामले की गंभीरता उजागर होती है। पहली शिकायतकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और विधिक कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि शिक्षा विभाग में नियमों की अनदेखी कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
दूसरी ओर, जावेद अहमद खान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज, बरगादपुर लेहरा का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, 31 मार्च 2026 को कार्यवाहक प्रधानाचार्य राम नारायण यादव के सेवानिवृत्त होने के बाद वरिष्ठ शिक्षक किरण मिश्रा को पद न देकर जूनियर शिक्षक राजेंद्र प्रसाद वर्मा को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बना दिया गया। आरोप है कि प्रबंधन समिति ने तथ्यों को छिपाते हुए गलत प्रस्ताव पारित किया और इसमें जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की मिलीभगत भी बताई जा रही है।
इतना ही नहीं, डीएवी नारंग इंटर कॉलेज, घुघली में भी वरिष्ठता निर्धारण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। प्रवक्ता राम अशीष सिंह ने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया है कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2002 से मान्य होने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर वर्ष 2006 में नियुक्त जोगेंद्र प्रसाद को वरिष्ठ मानते हुए कार्यवाहक प्रधानाचार्य बना दिया गया। यह निर्णय शासनादेशों के विपरीत बताया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन नियुक्तियों में भारी धन उगाही और मिलीभगत की आशंका है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो शिक्षा व्यवस्था की साख पर गहरा असर पड़ सकता है।
प्रदीप शर्मा प्रभारी बी एस ए रहते हुए भी पंडित जवाहरलाल नेहरू जुनियर हाई स्कूल में फर्जी अंकपत्र पर नौकरी करने वाले पांच सहायक अध्यापको को बचाने का प्रबल प्रयास किए जिसकी पुष्टि बेसिक शिक्षा निदेशक उत्तर प्रदेश लखनऊ को भेजीं गई जिला विद्यालय निरीक्षक गोरखपुर के रिपोर्ट से से हुई है जिनको गंभीरता से लेते हुए निदेशक बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश लखनऊ प्रताप सिंह बघेल द्वारा बिश्रित जांच कर कार्यवाही के सम्बन्ध में आदेश भी जारी किया गया है
अब देखने वाली बात यह होगी कि इन गंभीर आरोपों और शिकायतों के बाद विभागीय उच्च अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं। क्या दोषियों पर शिकंजा कसेगा या फिर मामला दबा दिया जाएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।