रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी
महराजगंज जनपद के परमहंस पाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गुरली सबया से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें महाविद्यालय प्रबंधन पर बीएससी पाठ्यक्रम की मान्यता प्राप्त करने में कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा है। यह महाविद्यालय सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर से सम्बद्ध बताया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार मनोज कुमार तिवारी द्वारा अपर मुख्य सचिव, उच्च शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन को प्रेषित एक शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि महाविद्यालय के प्रबंधक द्वारा एक ही एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद) के आधार पर बीए, बीकॉम और बीएससी जैसे विभिन्न पाठ्यक्रमों की सम्बद्धता प्राप्त की गई। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि बीएससी पाठ्यक्रम की मान्यता लेने के बाद संबंधित अनुदान भी प्राप्त किया गया, लेकिन बाद में मान्यता को निरस्त करा लिया गया, जिससे पूरे प्रकरण में वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी की आशंका व्यक्त की जा रही है।
शिकायतकर्ता ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का भी मामला बनता है।
इस संबंध में अपर मुख्य सचिव से अनुरोध किया गया है कि महाविद्यालय द्वारा प्रस्तुत एफडीआर, प्राप्त अनुदान और मान्यता प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित प्रबंधक के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल, मामले की आधिकारिक पुष्टि और जांच के आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला शिक्षा क्षेत्र में एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आ सकता है।