महराजगंज में हाईमास्ट-स्ट्रीट लाइट भुगतान मामले ने पकड़ा तूल, जांच रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप

रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी 

महराजगंज। विकासखंड सदर परिसर में हाईमास्ट लाइट और ग्राम पंचायत सोनरा में स्ट्रीट लाइट के नाम पर हुए भुगतान को लेकर उठे सवाल अब मंडलीय स्तर तक पहुंच गए हैं। मामले में गठित जांच समिति द्वारा जांच आख्या मुख्य विकास अधिकारी को करीब चार महीने पहले उपलब्ध कराए जाने के बावजूद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने का आरोप है। इसी मामले में अब गोरखपुर मंडल के आयुक्त कार्यालय ने जिलाधिकारी महराजगंज से एक सप्ताह  के भीतर आख्या तलब की है 

आयुक्त कार्यालय से जारी पत्र संख्या 2251/इक्कीस-42(25-26) में शिकायतकर्ता 2 सितंबर 2026 के पत्र का हवाला देते हुए आयुक्त के आदेश का उल्लेख किया गया है। आदेश में सवाल किया गया है कि “आख्या पर कार्यवाही क्यों नहीं की गयी? आख्या के साथ प्रस्तुत हो।”

मामला वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य वित्त से कराए गए कार्यों से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सदर विकासखंड महराजगंज परिसर में हाईमास्ट लाइट के लिए 2,29,093 रुपये तथा ग्राम पंचायत सोनरा में स्ट्रीट लाइट के लिए 4,46,627 रुपये का भुगतान मेसर्स स्वतंत्र इंटरप्राइजेज, खुटहां बाजार को किया गया। शिकायतकर्ता ने इन भुगतानों में वित्तीय नियमों और निविदा प्रक्रिया के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

दस्तावेजों के अनुसार, मुख्य विकास अधिकारी द्वारा 24 दिसंबर 2025 को वरिष्ठ कोषाधिकारी और अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड लोक निर्माण विभाग की जांच समिति गठित की गई थी। इसके बाद समिति की ओर से वरिष्ठ कोषाधिकारी ने 30 अप्रैल 2026 को जांच आख्या मुख्य विकास अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने की बात अपने पत्र में दर्ज की है।

वहीं, 2 सितंबर 2026 को वरिष्ठ कोषाधिकारी द्वारा आरटीआई के जवाब में भी स्पष्ट किया गया कि समिति की जांच आख्या 30 अप्रैल 2026 के पत्र के माध्यम से मुख्य विकास अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजी जा चुकी है, लेकिन सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिए गए निर्णय की जानकारी वरिष्ठ कोषाधिकारी को नहीं है।

अब शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच रिपोर्ट उपलब्ध होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें लगातार उच्च अधिकारियों का दरवाजा खटखटाना पड़ा। इसी क्रम में आयुक्त कार्यालय ने जिलाधिकारी से मामले में अब तक की कार्रवाई की आख्या और जांच रिपोर्ट के साथ जवाब एक सप्ताह में मांगा है।

फिलहाल बड़ा सवाल यही है कि जांच समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई क्यों लंबित रही और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया कहां तक पहुंची? आयुक्त के निर्देश के बाद जिलास्तरीय प्रशासन की आख्या से ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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