रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

महराजगंज। ग्रामीण रोजगार की सबसे बड़ी योजना मनरेगा में अब डिजिटल सेंधमारी का बड़ा मामला सामने आया है। जिले के कई ब्लॉकों में एक मोडिफाइड (क्लोन) ऐप के जरिए फर्जी मजदूरों की हाजिरी लगाकर भुगतान निकालने का खेल उजागर हुआ है। खास बात यह है कि यह ऐप किसी आधिकारिक प्लेटफॉर्म या प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं है, बल्कि टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए 10 से 15 हजार रुपये प्रति माह में बेचा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जब मनरेगा पोर्टल पर अचानक मजदूरों की संख्या में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज हुई, तो अधिकारियों को संदेह हुआ। जांच में पाया गया कि कई कार्यस्थलों पर वास्तविक काम नगण्य था, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज थी। कई नाम ऐसे भी सामने आए जो जमीनी स्तर पर मौजूद ही नहीं थे। यहीं से फर्जीवाड़े की परतें खुलनी शुरू हुईं।

जांच में सामने आया कि इस क्लोन ऐप का प्रचार यूट्यूब वीडियो के जरिए किया जा रहा है, जहां इसे इस्तेमाल करने का तरीका भी बताया जाता है। इच्छुक लोगों को टेलीग्राम चैनलों या निजी मैसेज के जरिए संपर्क कराया जाता है और भुगतान के बाद ऐप व लॉगिन एक्सेस उपलब्ध करा दिया जाता है।
तकनीकी रूप से यह मोडिफाइड ऐप असली सरकारी एप जैसा दिखता है, लेकिन इसमें छेड़छाड़ कर कई अवैध फीचर जोड़ दिए गए हैं। इसमें फर्जी जीपीएस लोकेशन दिखाने, पुरानी या एडिटेड फोटो अपलोड करने, और एक ही व्यक्ति की हाजिरी कई नामों से दर्ज करने की सुविधा दी जाती है। इससे सिस्टम को यह भ्रम होता है कि मजदूर कार्यस्थल पर मौजूद हैं और काम चल रहा है।
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सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस प्रक्रिया के जरिए मजदूरी का पैसा फर्जी खातों में ट्रांसफर कर निकाला जा रहा है। स्थानीय स्तर पर मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है, क्योंकि बिना अंदरूनी जानकारी के इस तरह का संचालन संभव नहीं माना जा रहा।
महराजगंज के कई ब्लॉक इस घोटाले की जद में बताए जा रहे हैं। अब सवाल उठ रहा है कि सरकारी डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा कितनी मजबूत है और अब तक कितनी धनराशि का गबन हो चुका है। मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।