कोहड़े के बीज तस्करी की सूचना से लेकर ‘मैनेज’ कॉल तक: 23 मई की शिकायत पर अब कस्टम विभाग ने पत्रकार मनोज तिवारी से मांगा जवाब

Pardafas news 24×7 महराजगंज/निचलौल। भारत-नेपाल सीमा पर कथित तस्करी से जुड़ा एक पुराना मामला सितंबर 2026 में फिर चर्चा में आ गया है। 23 मई 2026 को नेपाल से भारत की ओर कथित रूप से ले जाए जा रहे कोहड़े के बीजों की तस्करी की सूचना दिए जाने के बाद अब सीमा शुल्क विभाग ने सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो का संज्ञान लेते हुए पत्रकार मनोज कुमार तिवारी से उनका पक्ष और उपलब्ध साक्ष्य मांगे हैं।

सीमा शुल्क (निवारक) मंडल नौतनवा के सहायक आयुक्त कार्यालय से 9 सितंबर 2026 को जारी पत्र, DIN 2026095320000036CADA और फाइल संख्या Gen (Vig/misc/316/2024/NTU 1742 के माध्यम से पत्रकार को 30 सितंबर 2026 तक कार्यालय में उपस्थित होकर वीडियो की पुष्टि करने तथा लिखित पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।

पत्र में विशेष रूप से पूछा गया है कि फेसबुक पर जारी वीडियो क्या उन्हीं द्वारा प्रसारित किया गया था। यदि हां, तो वीडियो से संबंधित अपना लिखित पक्ष और उपलब्ध अन्य साक्ष्य कार्यालय में जमा करने को कहा गया है। साथ ही वीडियो में जिन दो व्यक्तियों—शिवकुमार और शैलेश—का नाम लिया गया है, उनके नाम-पते उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है, ताकि विभाग उनसे पूछताछ कर सके।

क्या है पत्रकार का आरोप?

पत्रकार मनोज तिवारी का आरोप है कि 23 मई को उन्होंने तत्कालीन कस्टम अधीक्षक निचलौल भगवान शाह को कथित तस्करी की सूचना दी थी। उनका दावा है कि सूचना पर तत्काल कार्रवाई होने के बजाय इसकी जानकारी कथित तस्करों तक पहुंच गई। इसके बाद उनके अनुसार मोबाइल नंबर 9794321292 से एक व्यक्ति ने संपर्क कर मामले को “मैनेज” करने की बात कही।

मनोज तिवारी का कहना है कि उक्त बातचीत व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से रिकॉर्ड की गई और बाद में सोशल मीडिया वीडियो के जरिए सार्वजनिक की गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

अब जांच के केंद्र में वीडियो और साक्ष्य

कस्टम विभाग ने अपने पत्र में वीडियो का संज्ञान लेते हुए पत्रकार से साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि जांच के दौरान कथित कॉल रिकॉर्डिंग, तस्करी संबंधी पूर्व सूचना और वीडियो में लगाए गए आरोपों की विभाग किस स्तर पर जांच करता है।

सबकी निगाहें 30 सितंबर 2026 पर हैं, जब पत्रकार को अपना पक्ष और उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और कथित तस्करी सूचना पर उस समय क्या कार्रवाई की गई थी।

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