महराजगंज जनपद में हैवी वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत आखिरकार उत्तर प्रदेश शासन तक पहुंच गई है। शासन के सतर्कता अनुभाग-3 द्वारा दिनांक 30 अक्टूबर 2025 को जारी पत्र (संख्या-1263/39-3-2025) में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है कि उप संभागीय परिवहन कार्यालय, महराजगंज द्वारा फर्जी अभिलेखों के आधार पर अवैध धन लेकर लाइसेंस निर्गत किए जाने संबंधी शिकायत पर जांच प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।

यह शिकायत ग्राम सिंहपुर, थाना-निचलौल निवासी मनोज कुमार तिवारी द्वारा की गई थी, जिस पर शासन ने गंभीरता दिखाते हुए न केवल पत्र की प्राप्ति स्वीकार की, बल्कि नियमावली के अनुरूप शिकायतकर्ता से साक्ष्य और शपथ-पत्र प्रस्तुत करने को भी कहा है। शासनादेश संख्या 13/1/97-क-1/1997 के आधार पर यह निर्देश जारी किए गए हैं, जो लोकसेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार मामलों में पारदर्शी जांच सुनिश्चित करते हैं।
संयुक्त सचिव अतुल कुमार मिश्र द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र ने यह संकेत दे दिया है कि प्रकरण फाइलों में दबने वाला नहीं है। अब शासन स्तर से सतर्कता प्रकोष्ठ सक्रिय हो गया है और आने वाले दिनों में बड़े खुलासे की पूरी संभावना है। लंबे समय से परिवहन विभाग में मनमानी, दलालों की सक्रियता और कथित अवैध उगाही की चर्चाओं के बीच यह कार्रवाई आम नागरिकों के लिए राहत की उम्मीद भी जगा रही है।
शासन की यह पहल न केवल विभागीय जवाबदेही तय करेगी बल्कि महराजगंज क्षेत्र में ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत करने की प्रक्रिया में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में किन नामों का पर्दाफाश होता है और कितने अधिकारी जिम्मेदारी की जद में आते हैं।