मिड-डे मील घोटाला: महराजगंज के नारंग इंटर कॉलेज में गबन की पुष्टि, कार्यवाही पर उठे सवाल।

महराजगंज जनपद के डी०ए०वी० नारंग इंटर कॉलेज, घुघली में मध्यान्ह भोजन योजना की धनराशि के कथित गबन का मामला अब शासन स्तर तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य पर मिड-डे मील की धनराशि में अनियमितता और गबन के गंभीर आरोप पुष्ट हुए हैं लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक प्रदीप शर्मा द्वारा उन्हें बचाने के लिए विभागीय स्तर पर लीपापोती की गई है
प्रार्थी के अनुसार, इस प्रकरण में जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) महराजगंज श्री प्रदीप कुमार शर्मा द्वारा विधि विरुद्ध जांच आख्या प्रेषित की गई, जिससे आरोपित प्रभारी प्रधानाचार्य को संरक्षण दिया गया शिकायतकर्ता ने इस मामले में 17 नवंबर 2025 और 4 दिसंबर 2025 को अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन को साक्ष्य सहित शिकायत भेजी थी। जब वहां से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो 11 दिसंबर और 20 दिसंबर 2025 को मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन से सतर्कता जांच की मांग करते हुए प्रार्थना पत्र प्रेषित किया गया।
बताया गया कि शासन स्तर पर संज्ञान लेने के बाद उप सचिव, माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-5, लखनऊ द्वारा 1 जनवरी 2026 को पत्र जारी कर शिकायतकर्ता से शपथ पत्र एवं अतिरिक्त साक्ष्य की मांग की गई। शिकायतकर्ता ने 12 जनवरी 2026 को शपथ पत्र व साक्ष्य उपलब्ध करा दिए, लेकिन अब तक किसी प्रकार की निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है। इससे शासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।
इस बीच, उप सचिव द्वारा 26 जनवरी 2026 को शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को तीन दिन के भीतर सम्यक परीक्षण कर आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश भी जारी किया गया है। लेकिन आख्या उपलब्ध न कराने के कारण 6 फरवरी 2026 को तत्काल आख्या उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया इसी दौरान शिकायत कर्ता ने मुख्य सचिव शासन को भेज पत्र में यह मांग किया है कि प्रदीप कुमार शर्मा द्वारा प्रेषित विधिविरुद्ध जांच आख्या एवं उन्हें संरक्षण प्रदान करने वाले अधिकारियों की भी जांच सतर्कता विभाग से कराई जाएं
मामला अब केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा विभाग की जवाबदेही, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध शासन की प्रतिबद्धता की परीक्षा बन चुका है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह स्पष्ट होगा कि मध्यान्ह भोजन जैसी महत्वपूर्ण योजना में बच्चों के अधिकारों से खिलवाड़ हुआ है। अब निगाहें शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में निष्पक्ष सतर्कता जांच होगी या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।