मदरसा अजीजिया प्रबंधन विवाद में बड़ा फैसला: बेलाल पद से निष्कासित, नौशाद आलम वैध प्रबंधक घोषित

रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

महराजगंज जनपद की तहसील निचलौल स्थित मदरसा अजीजिया असायतुल उलूम, मीर शिकारी टोला अजमत नगर, सिसवा बाजार के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद आखिरकार न्यायालय के आदेश से स्पष्ट हो गया है। उपजिलाधिकारी निचलौल एवं विहित प्राधिकारी सिद्धार्थ गुप्ता ने वाद संख्या 4193/2023 में सुनवाई करते हुए दिनांक 23 फरवरी 2026 को महत्वपूर्ण आदेश पारित किया, जिसमें दिनांक 04 अप्रैल 2023 की कार्यवाही को विधिसम्मत मानते हुए नौशाद आलम को मदरसे का वैध प्रबंधक घोषित कर दिया गया है, जबकि बेलाल पुत्र हसनैन को पद से निष्कासित किया जाना विधि संगत माना गया है।

यह विवाद उत्तर प्रदेश सोसायटीज रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1860 की धारा 25(1) के अंतर्गत दायर किया गया था। याची नौशाद आलम पुत्र हफीजुल्लाह एवं अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया था कि मदरसा अजीजिया, जिसका पंजीकरण वर्ष 1987-88 में हुआ था और जिसका समय-समय पर नवीनीकरण होता रहा है, उसके प्रबंधन में अनियमितताएं और फर्जीवाड़ा किया गया। याचिका में कहा गया कि पूर्व प्रबंधक अंजूम कादरी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे और उन्हें अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से हटाया गया था। इसके बाद बेलाल को वैध प्रबंधक घोषित किया गया था, लेकिन बाद में कथित सुलहनामे और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फिर से विवाद उत्पन्न हो गया।

न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत अभिलेखों और शपथपत्रों से यह तथ्य सामने आया कि अंजूम कादरी द्वारा प्रस्तुत कई बैठकों की कार्यवाहियां—दिनांक 10 मार्च 2023, 22 मार्च 2023, 27 मार्च 2023, 16 अप्रैल 2023, 28 अप्रैल 2023, 2 जून 2023 और 18 जून 2023—को समिति के अनेक सदस्यों ने फर्जी और कूटरचित बताया। वैध प्रबंध समिति के 27 में से 18 सदस्यों तथा साधारण सभा के 47 में से 32 सदस्यों ने शपथपत्र देकर इन बैठकों को अस्वीकार किया। कुछ सदस्यों ने तो यहां तक कहा कि उनके हस्ताक्षर जाली बनाए गए हैं और उन्होंने संबंधित शपथपत्रों पर कोई हस्ताक्षर नहीं किया।

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न्यायालय ने यह भी पाया कि सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स सोसाइटीज एवं चिट्स, गोरखपुर द्वारा दिनांक 27 जून 2023 को पारित आदेश उस समय दिया गया, जब प्रबंधन संबंधी विवाद लंबित था और न्यायालय द्वारा पत्रावली तलब की जा चुकी थी। ऐसे में उक्त आदेश को धारा 25(1) के प्रावधानों के विपरीत माना गया।

उपजिलाधिकारी ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि पूर्व में दिनांक 27 मार्च 2021 के न्यायालयीय आदेश के आधार पर बेलाल के नेतृत्व वाली समिति को पंजीकृत किया गया था, जिसका कार्यकाल 27 नवंबर 2022 से 27 नवंबर 2027 तक निर्धारित था। 22 नवंबर 2022 को चुनाव भी हुआ था, जिसमें बेलाल पुनः प्रबंधक चुने गए थे। लेकिन इसके पश्चात जो घटनाक्रम सामने आया, उसमें कथित सुलहनामा, फर्जी दस्तावेज और विवादित बैठकें शामिल थीं। न्यायालय ने यह माना कि 4 अप्रैल 2023 को वैध अध्यक्ष शाह अल्तमस की अध्यक्षता में आयोजित बैठक विधिसम्मत थी और उसी बैठक में बेलाल को निष्कासित कर नौशाद आलम को प्रबंधक चुना गया था।

प्रतिवादी पक्ष की ओर से यह तर्क दिया गया कि वाद पोषणीय नहीं है क्योंकि धारा 25(1) के अंतर्गत वाद दाखिल करने का अधिकार केवल पंजीकृत सोसायटी के एक-चौथाई सदस्यों को है, और याचीगण में अधिकांश सदस्य पंजीकृत नहीं थे। साथ ही यह भी कहा गया कि प्रबंधन विवाद का निस्तारण सहायक रजिस्ट्रार द्वारा किया जा चुका है और उपजिलाधिकारी को उसे निरस्त करने का अधिकार नहीं है। किंतु न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, शपथपत्रों और पूर्व आदेशों के आलोक में इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और माना कि विवाद की स्थिति में सही समिति का निर्धारण धारा 25(1) के अंतर्गत न्यायालय का अधिकार क्षेत्र है।

अपने अंतिम आदेश में उपजिलाधिकारी सिद्धार्थ गुप्ता ने स्पष्ट किया कि 4 अप्रैल 2023 की कार्यवाही विधिक है, और उसी के आधार पर गठित कार्यकारिणी को विधिमान्य घोषित किया जाता है। बेलाल पुत्र हसनैन को प्रबंधक पद से निष्कासित किया जाना विधि संगत माना गया, जबकि नौशाद आलम पुत्र हफीजुल्लाह का प्रबंधक पद पर चयन वैध घोषित किया गया। साथ ही आदेश की प्रति सहायक रजिस्ट्रार फर्म्स सोसाइटीज एवं चिट्स, गोरखपुर को भेजे जाने का निर्देश दिया गया।

यह फैसला सिसवा बाजार क्षेत्र में काफी चर्चित हो गया है, क्योंकि मदरसे के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से दो गुटों के बीच टकराव चल रहा था। न्यायालय के इस निर्णय से फिलहाल प्रबंधन संबंधी स्थिति स्पष्ट हो गई है, हालांकि यह देखना शेष है कि प्रतिवादी पक्ष इस आदेश के विरुद्ध उच्च न्यायालय का रुख करता है या नहीं।

फिलहाल न्यायालय के आदेश से यह तय हो गया है कि मदरसा अजीजिया असायतुल उलूम की बागडोर अब विधिक रूप से नौशाद आलम के हाथों में रहेगी, और पूर्व प्रबंधक बेलाल का निष्कासन वैध माना जाएगा। यह निर्णय सोसायटी पंजीकरण से जुड़े विवादों में न्यायालय की भूमिका और धारा 25(1) के महत्व को भी रेखांकित करता है।

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