गोरखपुर के हाटा बाज़ार महुराई में फर्जी बैनामा और दबंगई का आरोप, ब्लॉक प्रमुख पर अवैध कब्जे का गंभीर मामला, पीड़ित ने लगाई न्याय की गुहार

रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी 

गोरखपुर जनपद के हाटा बाज़ार क्षेत्र अंतर्गत महुराई गांव से एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ भूमि पर फर्जी बैनामा कराकर अवैध कब्जा किए जाने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित शिवदयाल गुप्ता, जो ग्राम बरपरवा बाबू, थाना बेलघाट के निवासी हैं और श्री साई कृपा कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड, महुराई के निदेशक हैं, ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि गगहा क्षेत्र के ब्लॉक प्रमुख शिवाजी चन्द ने अपने रसूख और दबंगई के बल पर उनकी पैतृक एवं वैध रूप से खरीदी गई भूमि पर अवैध कब्जा कर रखा है।

शिवदयाल गुप्ता के अनुसार, उन्होंने 27 सितंबर 1990 को बांसगांव तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा महुराई में स्थित आराजी संख्या 821 (रकबा 68 डिसमिल) एवं आराजी संख्या 762 मि. भूमि का विधिवत बैनामा कराया था। बैनामे के उपरांत नामांतरण आदेश भी पारित हुआ, राजस्व अभिलेखों में उनका नाम दर्ज हुआ और भूमि पर चाहरदीवारी व गेट बनाकर उन्हें कब्जा भी प्राप्त हो गया था। यह भूमि उनकी वर्षों की मेहनत और कमाई से अर्जित की गई थी।

पीड़ित का आरोप है कि वर्ष 2004 में उसी भूमि के एक हिस्से का फर्जी बैनामा कराकर नामांतरण करा लिया गया, जबकि उस समय कथित विक्रेता का नाम ही राजस्व अभिलेखों में दर्ज नहीं था। इसके बाद वर्ष 2014 में पूरे रकबे का दोबारा फर्जी बैनामा कराकर नामांतरण करा लिया गया। चूँकि शिवदयाल गुप्ता और उनका परिवार लंबे समय से मुंबई में रहकर मेहनत-मजदूरी के जरिए जीवनयापन कर रहा था, इसलिए इस पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी उन्हें समय पर नहीं हो सकी।

वर्ष 2025 में जब उन्हें इस अवैध कृत्य की जानकारी हुई, तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली। प्रारंभिक स्तर पर भले ही उन्हें तत्काल राहत न मिली हो, लेकिन उपजिलाधिकारी बांसगांव ने 14 अगस्त 2025 को उनके पक्ष में आदेश पारित करते हुए प्रकरण की पुनः सुनवाई के निर्देश दिए। इस आदेश के विरुद्ध दाखिल निगरानी को गोरखपुर मंडलायुक्त ने 12 नवंबर 2025 को निरस्त कर दिया।

अंततः 30/31 दिसंबर 2025 को तहसीलदार बांसगांव द्वारा वर्ष 2004 एवं 2014 के दोनों नामांतरण आदेशों को निरस्त कर दिया गया और राजस्व अभिलेखों से विपक्षी का नाम पूरी तरह हटा दिया गया। इसके बावजूद, शिवदयाल गुप्ता का आरोप है कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना करते हुए ब्लॉक प्रमुख शिवाजी चन्द द्वारा भूमि पर जबरन कब्जा बनाए रखा गया है। पीड़ित का कहना है कि उनके गेट पर लगे ताले को तोड़कर दूसरा ताला जड़ दिया गया और समझौते के लिए दबाव व धमकियाँ दी जा रही हैं।

इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि सड़क परियोजना के अंतर्गत भूमि के एक हिस्से का मुआवजा भी कथित रूप से शिवाजी चन्द द्वारा प्राप्त कर लिया गया है, जिसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई है। शिवदयाल गुप्ता का कहना है कि जब भी वे अपनी जमीन पर जाते हैं, तो रसूखदार ब्लॉक प्रमुख शिवाजी चन्द, दिनकर चन्द और राजनाथ यादव स्थानीय पुलिस को गुमराह कर उन्हें प्रताड़ित कराते हैं। उनका आरोप है कि गगहा पुलिस राजनीतिक दबाव में एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए उनका ही चालान कर देती है।

पीड़ित ने भावुक होते हुए कहा कि एक शांतिप्रिय व्यापारी होने के बावजूद उन्हें अपनी ही जमीन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। न्यायालयों से उनके पक्ष में आदेश होने के बाद भी यदि उन्हें कब्जा नहीं मिल पा रहा, तो आम नागरिक की सुरक्षा और अधिकारों का क्या होगा—यह बड़ा सवाल है।

शिवदयाल गुप्ता ने प्रशासन से मांग की है कि न्यायालय एवं राजस्व अधिकारियों के वैध आदेशों का पालन कराते हुए उनकी भूमि से अवैध कब्जा हटवाया जाए, उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। यह मामला केवल एक व्यक्ति की जमीन का नहीं, बल्कि कानून के सम्मान और आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा हुआ है।

error: Content is protected !!