रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी
महराजगंज जनपद में भ्रष्टाचार की शिकायतों की जांच को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम सिंहपुर निवासी शिकायतकर्ता मनोज कुमार तिवारी द्वारा 29 फरवरी 2026 को मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को संबोधित एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा गया था, जिसमें सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) अभिषेक यादव पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।

शिकायत के साथ ही शिकायतकर्ता द्वारा शपथ-पत्र और आवश्यक साक्ष्य भी पहले ही संलग्न किए जा चुके थे। इसके बावजूद अब सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, महराजगंज के निर्देश पर अपर जिला सहकारी अधिकारी द्वारा पुनः शपथ-पत्र और साक्ष्य उपलब्ध कराने का नोटिस जारी किया गया है। यह आदेश शासनादेश दिनांक 29.01.2024 के हवाले से दिया गया है, जिसमें जांच से पहले साक्ष्य और शपथ-पत्र अनिवार्य बताया गया है।
हालांकि, यहां बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब शिकायत के साथ पहले ही साक्ष्य और शपथ-पत्र उपलब्ध कराए जा चुके हैं, तो पुनः इन्हें मांगने का औचित्य क्या है? क्या यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया है या फिर जांच को जानबूझकर लंबा खींचने का प्रयास?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस प्रकार की कार्यवाही से न केवल जांच की गति प्रभावित होती है, बल्कि इससे आरोपी को लाभ पहुंचाने की संभावना भी बढ़ जाती है। उनका कहना है कि बार-बार साक्ष्य मांगना जांच को कमजोर करने और शिकायतकर्ता को हतोत्साहित करने का तरीका हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखता है या फिर यह मामला भी लंबित जांचों की सूची में शामिल हो जाता है।