हुनर युवाओं का, सुर्खियों में स्थानीय नेता; उपलब्धि के बहाने सियासी चमक-दमक पर उठे सवाल
महराजगंज, 20 अगस्त। जिले के दो युवा स्केटर रितेश और शिवशंकर ने अपनी अद्भुत मेहनत, साहस और जुनून के दम पर स्केटिंग करते हुए अयोध्या, खाटू श्याम, केदारनाथ, चार धाम और हरिद्वार तक की लंबी धार्मिक यात्रा पूरी कर जिले का नाम रोशन किया। 25 जुलाई को महराजगंज से यात्रा पर निकले दोनों युवा गुरुवार को गंगाजल के साथ जनपद में वापस पहुंचे। सक्सेना तिराहे पर स्थानीय लोगों और नेताओं ने उनका स्वागत किया।

दोनों युवाओं की यह यात्रा इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने सैकड़ों किलोमीटर की दूरी स्केटिंग के जरिए तय की। रास्ते की कठिनाइयों, मौसम और शारीरिक थकान के बावजूद लक्ष्य के प्रति उनका समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उनकी उपलब्धि निश्चित तौर पर सम्मान और प्रोत्साहन की हकदार है।
हालांकि, इस उपलब्धि के स्वागत समारोह के साथ स्थानीय राजनीति का एक पुराना सवाल भी चर्चा में आ गया। कार्यक्रम में नेताओं की मौजूदगी, मंच और तस्वीरों को लेकर लोगों के बीच यह सवाल उठता रहा कि जिस उपलब्धि के पीछे युवाओं की महीनों की मेहनत और संघर्ष है, उसमें उनका सहयोग यात्रा शुरू होने से पहले कितना रहा?
लोगों का कहना है कि किसी युवा की सफलता के बाद माला पहनाना और अंगवस्त्र देकर सम्मानित करना अच्छी परंपरा है, लेकिन वास्तविक प्रोत्साहन तब माना जाएगा, जब प्रतिभाओं को सफलता की राह पर आगे बढ़ने के लिए संसाधन और सहयोग भी उपलब्ध कराया जाए।
जिले में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। अनेक युवा सीमित संसाधनों के बावजूद खेल, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में जरूरत केवल स्वागत समारोह आयोजित करने की नहीं, बल्कि युवाओं को प्रशिक्षण, खेल उपकरण, सुविधाएं, आर्थिक सहयोग और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की भी है।
स्वागत समारोह में नेताओं ने रितेश और शिवशंकर के साहस और लगन की सराहना की। यह निश्चित रूप से स्वागत योग्य है। लेकिन सवाल यह है कि क्या जिले की राजनीति युवाओं की प्रतिभा को केवल उपलब्धि हासिल करने के बाद मंच देगी, या उनकी यात्रा शुरू होने से पहले भी उनके साथ खड़ी होगी?
यदि जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठन इन दोनों युवाओं सहित जिले की अन्य प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए ठोस पहल करें तो ऐसे स्वागत समारोहों का महत्व और बढ़ जाएगा। वरना सवाल बना रहेगा—स्केटिंग युवाओं ने की, सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा युवाओं ने पूरी की, जिले का नाम युवाओं ने रोशन किया, तो फिर स्वागत की तस्वीर में सबसे आगे कौन और क्यों?
रितेश और शिवशंकर की उपलब्धि केवल दो युवाओं की सफलता नहीं, बल्कि जिले के उन तमाम युवाओं के लिए संदेश है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। अब देखना होगा कि उनकी प्रतिभा को तालियों और तस्वीरों से आगे कितना वास्तविक सहयोग मिलता है।