ग्राम पंचायत बलुआ में मनरेगा फर्जीवाड़ा उजागर, उच्चस्तरीय जांच की मांग — आईजीआरएस रिपोर्ट पर भी सवाल

महराजगंज। विकास खंड परतावल की ग्राम पंचायत बलुआ में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद अब यह प्रकरण सुर्खियों में है। मनोज कुमार तिवारी, निवासी सिंहपुर, पोस्ट औराटार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत सीधे निदेशक, महात्मा गांधी नरेगा, ग्रामीण विकास मंत्रालय, नई दिल्ली को भेजी गई है। आवेदन में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि ग्राम पंचायत प्रशासन, रोजगार सेवक और पंचायत सचिव की मिलीभगत से करोड़ों की योजना को लूट का माध्यम बनाया गया है।

शिकायत में कहा गया है कि गांव में तैयार किए गए रोजगार डिमांड रजिस्टर और जॉब कार्ड पर एक ही व्यक्ति के अंगूठे के निशान का उपयोग करके दर्जनों काल्पनिक मजदूरों के नाम दर्ज किए गए। कई मजदूरों के नाम पर कार्य दिखाकर भुगतान निकाला गया, जबकि उन्होंने कोई कार्य नहीं किया।

सबसे गंभीर मामला “समशेर के खेत से कतोपुल्लाह के खेत तक मिट्टी कार्य” (आईडी-31520100334095.2486755824749586) का है, जिसमें ₹1,24,257 की स्वीकृत राशि दर्शाई गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस कार्य में ज्यादातर मजदूर पूरी तरह काल्पनिक पाए गए।

शिकायत के बाद शासन ने इस मामले का निस्तारण आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से किया, लेकिन शिकायतकर्ता ने इस रिपोर्ट को फर्जी, मनगढ़ंत और वास्तविक तथ्यों के विपरीत बताया है। आईजीआरएस निस्तारण आख्या (पत्रांक 978, दिनांक 01-11-2025) में जांच अधिकारियों ने दावा किया है कि कार्य स्थल पर कार्य पाया गया और मजदूरों ने मजदूरी मिलने की पुष्टि की। जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच न तो पारदर्शी थी, न ही उन्हें इसमें शामिल किया गया।

रिपोर्ट में दर्ज मजदूरों के बयान और स्थल निरीक्षण पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच अधिकारी द्वारा दिखाए गए मजदूर वास्तविक मजदूर नहीं थे और उनका श्रम से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि जांच के समय उनसे संपर्क करने का दावा भी असत्य है, क्योंकि उनका मोबाइल लगातार चालू था।

इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता ने उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मजदूरों के अधिकारों का हनन हुआ है और मनरेगा के तहत गरीबों के लिए निर्धारित धन को बंदरबांट कर लिया गया।

मामला अब जिले से निकलकर दिल्ली तक पहुंच चुका है और शिकायतकर्ता को उम्मीद है कि केंद्र स्तर पर वास्तविक सत्य उजागर होगा और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई होगी।

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