महराजगंज जनपद के निचलौल ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत बकुलडीहा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत बड़े पैमाने पर डिजिटल फर्जीवाड़ा सामने आया है। NMMS ऐप के माध्यम से दर्ज की गई दैनिक हाज़िरी और अपलोड किए गए समूह फोटो का अवलोकन करने पर चौंकाने वाले तथ्य उजागर होते हैं, जो इस महत्वाकांक्षी योजना को भ्रष्टाचार का केंद्र बना रहे हैं।

उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, ग्राम पंचायत स्तर दोनों जगहों पर एक ही दिन में अलग-अलग कार्य दिखाए गए हैं। कुल 19 मस्टर रोल में लगभग 183 श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जबकि साइट पर अपलोड किए गए समूह फोटो में मात्र 10 व्यक्तियों के चेहरे ही बार-बार दिखाई देते हैं। यही नहीं, उन्हीं सीमित व्यक्तियों की तस्वीरें अलग-अलग मस्टर रोल में जोड़कर सैकड़ों मजदूरों की हाज़िरी दर्शा दी गई है।

NMMS ऐप में दर्ज समय, अपलोडिंग टाइम और जियो-कोऑर्डिनेट्स भी संदेह पैदा करते हैं। एक ही स्थान के लगभग समान जियो-लोकेशन पर अलग-अलग कार्यों की उपस्थिति दर्ज है। कई जगह टाइमस्टैम्प और अपलोड टाइम में असंगतियां दिखती हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वास्तविक कार्यस्थल पर निर्धारित संख्या में श्रमिक मौजूद नहीं थे। इसके बावजूद, उपस्थिति “प्रेज़ेंट” दर्शाकर सरकारी भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

रिकॉर्ड में यह भी सामने आया है कि फोटो अपलोड करने वाले व्यक्ति की पहचान ग्राम पंचायत स्तर के कर्मी के रूप में दर्ज है, और वही व्यक्ति दोनों कार्यों में फोटो अपलोड करता दिख रहा है। इससे मिलीभगत और सुनियोजित फर्जीवाड़े की आशंका और गहरी हो जाती है। सवाल यह है कि जब एक ही दिन, एक ही पंचायत में सीमित लोगों की तस्वीरें लेकर सैकड़ों मजदूरों की हाज़िरी कैसे दर्ज हो सकती है?
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि मनरेगा में डिजिटल निगरानी के नाम पर NMMS ऐप को पारदर्शिता का औज़ार बताया गया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट दिख रही है। ऐप का दुरुपयोग कर वास्तविक मजदूरों को काम और मज़दूरी से वंचित किया जा रहा है, जबकि काग़ज़ों में भुगतान निकालकर सरकारी धन का गमन किया जा रहा है।
यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं लगता। यदि उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और NMMS ऐप के डेटा, फोटो, जियो-कोऑर्डिनेट्स व मस्टर रोल का तकनीकी ऑडिट हो, तो बड़े नेटवर्क के उजागर होने की संभावना है। अब ज़रूरत है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को भ्रष्टाचार मुक्त किया जाए।