न्यूज़ रिपोर्ट – मनोज कुमार तिवारी
महराजगंज जनपद के मिठौरा ब्लॉक अंतर्गत टिकर ग्राम सभा में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का गंभीर मामला सामने आया है। एनएमएमएस (NMMS) ऐप के माध्यम से अपलोड की गई दैनिक उपस्थिति (डेली अटेंडेंस) का अवलोकन करने पर स्पष्ट होता है कि ज़मीन पर कार्य हुए बिना ही काग़ज़ों में मजदूरों की हाज़िरी दर्शाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।



उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार टिकर ग्राम सभा में तीन प्रमुख कार्यों के अंतर्गत कुल 18 मास्टर रोल (मस्टर रोल) दर्शाए गए हैं। इन मास्टर रोलों में कुल 154 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल उलट है। एनएमएमएस ऐप पर अपलोड की गई तस्वीरों में केवल कुछ ही महिलाओं के चेहरे बार-बार दिखाई देते हैं। चेहरे के मिलान (फेस मैचिंग) पर यह तथ्य सामने आता है कि पूरे 18 मास्टर रोल में अधिकतम 8 महिलाओं के चेहरे ही बार-बार उपयोग किए गए हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि जहां एक ओर 10-10 मजदूरों की उपस्थिति दिखाई गई है, वहीं तस्वीरों में कभी-कभी 2 पुरुषों के चेहरे भी नजर आते हैं, जो महिला श्रमिकों के नाम पर दर्ज हाज़िरी की पोल खोलते हैं। कई मास्टर रोल में वही महिला बार-बार जोड़ दी गई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि 154 मजदूरों की कोई वास्तविक फोटो अपलोड ही नहीं की गई।


स्थल निरीक्षण और स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो जिन कार्यों के नाम पर मजदूरी भुगतान दिखाया गया है, वे कार्य ज़मीन पर दिखाई ही नहीं देते। इससे यह संदेह और गहराता है कि संबंधित ग्राम पंचायत, रोजगार सेवक और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना को लूट का माध्यम बनाया गया है।
एनएमएमएस ऐप का उद्देश्य पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना था, लेकिन टिकर ग्राम सभा का यह मामला बताता है कि तकनीक का भी दुरुपयोग कर नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा।
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों से सरकारी धन की वसूली के साथ आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।