न्यूज़ रिपोर्ट – मनोज कुमार तिवारी
महराजगंज जनपद में भ्रष्टाचार के मामलों की जांच को लेकर प्रशासनिक उदासीनता एक बार फिर सामने आई है। विकास खण्ड मिठौरा की ग्राम पंचायत पकडियार बुजुर्ग के ग्राम प्रधान के विरुद्ध प्राप्त शिकायत पर लगभग 9 महीने बीत जाने के बावजूद जांच आख्या उपलब्ध नहीं कराई जा सकी, जिससे महराजगंज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले की शुरुआत 14 मई 2025 को होती है, जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महराजगंज द्वारा ग्राम प्रधान के विरुद्ध प्राप्त शिकायत की प्रारम्भिक जांच कर उसकी आख्या जिलाधिकारी महोदय को भेजने तथा उसकी प्रतिलिपि जिला पंचायत राज अधिकारी को उपलब्ध कराने का उल्लेख किया गया। इसके बाद भी जांच आख्या जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय को नहीं मिली।
जिला पंचायत राज अधिकारी महराजगंज द्वारा 01 जुलाई 2025 को पत्र संख्या 885 के माध्यम से जांच आख्या उपलब्ध कराने हेतु जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र प्रेषित किया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई जवाब नहीं दिया गया। अंततः करीब सात महीने बाद 16 दिसम्बर 2025 को पुनः रिमाइंडर पत्र भेजा गया, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि अब तक जांच आख्या अप्राप्त है।
यह पत्र शिकायतकर्ता को 09 जनवरी 2026 को प्राप्त हुआ, जिससे यह साफ हो गया कि शिकायत से लेकर रिमाइंडर तक की पूरी प्रक्रिया में लगभग 9 महीने का समय व्यतीत हो चुका है, लेकिन न तो जांच पूरी हुई और न ही दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई सामने आई।
सबसे हैरानी की बात यह है कि रिमाइंडर पत्र में जांच आख्या तीन दिवस के भीतर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है, जबकि पहले ही महीनों की देरी हो चुकी है। यह स्थिति दर्शाती है कि या तो जांच को जानबूझकर लंबित रखा गया है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन गंभीरता से नहीं किया गया।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जांच में देरी का सीधा लाभ आरोपितों को मिल रहा है, जबकि शिकायतकर्ता को बार-बार इंतजार और निराशा का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक स्तर पर ऐसी ढिलाई से न केवल भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलता है, बल्कि आम जनता का भरोसा भी सरकारी तंत्र से उठता जा रहा है।
अब सवाल यह है कि 9 महीने तक जांच आख्या रोकने के लिए जिम्मेदार कौन है, और क्या इस लापरवाही पर किसी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। जनपद में यह प्रकरण प्रशासनिक जवाबदेही की एक बड़ी परीक्षा बनकर सामने आया है।