डीएम के आदेश की आड़ में बेलगाम सिल्ट माफिया: निचलौल में बिना फार्म-सी सैकड़ों ट्रॉली अवैध बिक्री, सिंचाई व तहसील प्रशासन की भूमिका संदिग्ध

 

मनोज कुमार तिवारी प्रधान संपादक पर्दा फाश न्यूज 24×7

महराजगंज

जनपद की निचलौल तहसील अंतर्गत मधुबनी शाखा नहर (किमी 0.000 से किमी 2.000) में अवशेष सिल्ट के नाम पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन, परिवहन और खुलेआम बिक्री का खेल धड़ल्ले से जारी है। हैरत की बात यह है कि यह पूरा कारोबार जिलाधिकारी महराजगंज द्वारा 06 जनवरी 2026 को जारी आदेश की आड़ में चल रहा है, जबकि उसी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सिल्ट का उठान और परिवहन केवल सिंचाई विभाग की निगरानी में तथा प्रपत्र ‘सी’ (फार्म-सी) के माध्यम से ही किया जाएगा।

जमीनी हकीकत आदेश के ठीक उलट नजर आ रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार निचलौल क्षेत्र में नीलाम किए गए कार्यक्षेत्र से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रॉली सिल्ट की अवैध बिक्री हो रही है। यह सिल्ट कथित तौर पर लाभग्राही द्वारा खुले बाजार में बेची जा रही है, जबकि अब तक संबंधित लाभग्राहियों को फार्म-सी निर्गत ही नहीं किया गया है। नियमों के अनुसार बिना फार्म-सी न तो सिल्ट का उठान वैध है और न ही उसका परिवहन, इसके बावजूद ट्रैक्टर-ट्रॉली और हाइवा दिन-रात नहर पटरी से सिल्ट ढोते देखे जा रहे हैं।

Oplus_131072

जिलाधिकारी के आदेश में साफ उल्लेख है कि किसी भी परिस्थिति में नहर के तल, सोते या अन्य स्थानों से अवैध खनन नहीं किया जाएगा। साथ ही कार्यक्षेत्र के बाहर खनन पाए जाने पर निविदा निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके अलावा सिंचाई विभाग की निगरानी को अनिवार्य बताया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि यदि निगरानी वास्तव में हो रही है तो बिना फार्म-सी के सिल्ट का परिवहन कैसे संभव है? और यदि निगरानी नहीं हो रही है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि इस अवैध सिल्ट कारोबार से न केवल सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि नहरों की संरचनात्मक सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। कई स्थानों पर नहर की पटरी के साथ-साथ तल से भी सिल्ट निकाले जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे भविष्य में सिंचाई व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जब कोई इस अवैध खनन की शिकायत करता है तो उस पर दबाव बनाया जाता है।

खनन नियमावली एवं शासनादेश दिनांक 05.12.2019 के अनुसार, अल्प अवधि की ई-नीलामी में भी सभी नियमों और शर्तों का सख्ती से पालन अनिवार्य है। बावजूद इसके निचलौल क्षेत्र में नियम-कानून को खुलेआम ताक पर रखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई तो यह मामला एक बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।

इस पूरे मामले में खनन अधिकारी महराजगंज से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने टालमटोल रवैया अपनाते हुए कोई स्पष्ट जवाब देने से परहेज किया। इससे कहीं न कहीं अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका और गहराती नजर आ रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब टेंडर और नियमों की पूरी जानकारी तहसील प्रशासन निचलौल को है, तो फिर किसके संरक्षण में नियमों को दरकिनार कर मोटी रकम की वसूली के साथ यह अवैध खनन कराया जा रहा है?

अब जनता की निगाहें प्रशासन और शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना यह है कि बिना फार्म-सी चल रहे इस अवैध सिल्ट कारोबार पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर आदेश केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

error: Content is protected !!