महराजगंज: निचलौल के नौनिया पंचायत में NMMS ऐप से फर्जी हाज़िरी का खेल, इंटरलॉकिंग व नाली निर्माण में मानकों की खुली अनदेखी

रिपोर्ट- मनोज कुमार तिवारी संपादक पर्दा फाश न्यूज 24×7

महराजगंज जनपद के निचलौल ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत नौनिया में मनरेगा कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। NMMS ऐप के माध्यम से रोज़ाना मजदूरों की हाज़िरी दर्ज की जा रही है, लेकिन मौके पर कार्य न होने के आरोपों ने प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार एक ही दिन में अलग-अलग तीन मास्टर रोल (11307, 11308 और 11316) के तहत दर्जनों मजदूरों की उपस्थिति दिखाई गई है, जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थल पर न तो पर्याप्त मजदूर दिखे और न ही कार्य की प्रगति सिर्फ फोटो खींचकर साइट पर अपलोड किया जा रहा है।

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दिनांक 13 जनवरी 2026 को दर्ज हाज़िरी के मुताबिक, कार्य कोड 3152003007/RC/958486255823723895 और 3152003007/RC/958486255823723910 के अंतर्गत “हरी यादव के घर से विनय के घर तक इंटरलॉकिंग व पक्की नाली निर्माण” तथा “गंगा के घर से विनय के घर तक इंटरलॉकिंग व नाली निर्माण” जैसे कार्य दर्शाए गए। NMMS ऐप पर अपलोड ग्रुप फोटो में एक ही समय-सीमा और लगभग समान जियो-कोऑर्डिनेट्स (27.3968, 83.7048 के आसपास) दर्ज हैं। उल्लेखनीय यह भी है कि सभी मास्टर रोल में दूसरी फोटो अपलोड नहीं की गई, जबकि नियमों के अनुसार कार्य प्रगति का समुचित सत्यापन आवश्यक है।

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मास्टर रोल 11307 में 10, 11308 में 2 और 11316 में 8 मजदूरों की उपस्थिति दिखाई गई है। नामवार हाज़िरी दर्ज है, पर ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर वास्तविक श्रम नहीं हो रहा। इससे यह संदेह गहराता है कि कागज़ी मजदूरी के जरिए भुगतान निकाला जा रहा है।

इसके साथ ही निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इंटरलॉकिंग सड़क और नाली निर्माण में मानक आकार व मजबूती का पालन नहीं होने का आरोप है। नियमों के अनुसार इंटरलॉकिंग ईंटों का सामान्य आकार 230x100x75 मिमी (9x4x3 इंच) होना चाहिए और सड़क उपयोग हेतु कम से कम 200+ स्ट्रेंथ (MPa) अपेक्षित है। लेकिन स्थानीय निरीक्षण में उपयोग की जा रही ईंटें कमज़ोर (70–80 स्ट्रेंथ) बताई जा रही हैं। कहीं-कहीं घटिया लाल ईंटें प्रयुक्त होने की बात सामने आई है, जो न तो टिकाऊ हैं और न ही भार वहन के योग्य। जॉइंट्स की उचित फिटिंग, 2–3 मिमी के गैप और सही बेस-बेडिंग का भी पालन नहीं दिखता

ग्रामीणों का कहना है कि मानकों की अनदेखी कर घटिया सामग्री लगाने से सड़क और नाली जल्द क्षतिग्रस्त होंगी, जिससे सरकारी धन की बर्बादी होगी। सवाल यह भी उठता है कि ग्रुप फोटो लेने वाले ग्राम पंचायत स्तर के कर्मी द्वारा कार्य का वास्तविक सत्यापन क्यों नहीं किया गया।

मामले ने प्रशासनिक महकमे की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मांग की जा रही है कि स्वतंत्र जांच, भौतिक सत्यापन, थर्ड-पार्टी क्वालिटी टेस्ट और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही NMMS ऐप डेटा, जियो-टैग्ड फोटो और भुगतान रिकॉर्ड का ऑडिट कर वास्तविकता सामने लाई जाए, ताकि मनरेगा की पारदर्शिता बहाल हो सके।

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