बिना सत्यापन जारी हुआ रिहाई परवाना! SDM सदर की भूमिका पर उठे सवाल, जिला कारागार से अभियुक्त की रिहाई

महराजगंज जनपद में न्यायिक प्रक्रिया की गंभीर अनदेखी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। उप जिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम) सदर, महराजगंज द्वारा बिना समुचित सत्यापन के रिहाई परवाना जारी किए जाने का आरोप लगा है। मामला स्टेट बनाम रामराज आदि से जुड़ा है, जिसमें अभियुक्त की रिहाई को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रकरण संख्या 170/126/135/1800-2023 थाना सदर महराजगंज में अभियुक्त रामराज आदि के विरुद्ध मामला दर्ज था। अभिलेखों के अनुसार, प्रकरण में ₹1,00,000 की जमानत दाखिल की गई थी। इसके पश्चात दिनांक 17 जनवरी 2026 को रिहाई परवाना जिला कारागार अधीक्षक, महराजगंज को भेजा गया, जिसके आधार पर 18 जनवरी 2026 को अभियुक्त की रिहाई की प्रक्रिया पूरी की गई।

सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि नाम, पता एवं अन्य आवश्यक विवरणों के समुचित सत्यापन के बिना ही रिहाई परवाना कैसे जारी कर दिया गया? सूत्रों के मुताबिक, रिहाई परवाना जारी करने से पूर्व जिन कानूनी औपचारिकताओं और दस्तावेज़ी जांच की आवश्यकता होती है, उनका पालन नहीं किया गया। इससे न्यायिक पारदर्शिता और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय अधिवक्ताओं और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि बिना सत्यापन इस प्रकार रिहाई परवाने जारी होते रहे, तो इससे कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और अपराधियों के हौसले बढ़ेंगे। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले पर कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एसडीएम सदर की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। सवाल यह भी है कि क्या यह महज लापरवाही है या किसी दबाव अथवा मिलीभगत का परिणाम? प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है, ताकि दोषियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और शासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता कैसे बहाल की जाती है।

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