निचलौल मदरसे में नियमविरुद्ध नियुक्ति का खुलासा, कार्यवाहक प्रिंसिपल बनाकर वेतन बिल भेजने की कोशिश नाकाम

 निचलौल मदरसा अरब अजीजिया मजहरूल उलूम मैं नियम का उल्लंघन आम बात।

महराजगंज जनपद के निचलौल स्थित एक मदरसे में नियमों की खुलेआम अवहेलना का एक और गंभीर मामला सामने आया है। मदरसा प्रबंधन पर आरोप है कि निजी स्वार्थ के चलते सेवा नियमों को दरकिनार कर एक अस्थायी शिक्षक को कार्यवाहक प्रिंसिपल घोषित कर दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मदरसा प्रबंधक आबिद अली ने अस्थायी शिक्षक खालिद अली को कार्यवाहक प्रिंसिपल दर्शाते हुए उनसे बोर्ड संबंधी फॉर्म भरवाए और वेतन बिल तैयार कर भुगतान के उद्देश्य से अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कराया। यह पूरी प्रक्रिया उस समय अपनाई गई, जब मदरसे की प्रबंधन समिति की सूची 31 मार्च 2025 से उत्पन्न विवाद के चलते अब तक विधिवत पंजीकृत नहीं है।
निचलौल तहसील में धारा 25(1) से संबंधित वाद की कार्यवाही के दौरान यह मामला सामने आया। प्रथम दृष्टया यह कृत्य न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन है, बल्कि शासकीय धन के संभावित दुरुपयोग की श्रेणी में भी आता है। नियमों का संज्ञान लेते हुए अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने उक्त वेतन बिल को आपत्तियों के साथ निरस्त कर वापस कर दिया।
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, मदरसे में खालिद अली से वरिष्ठ एवं पूर्णतः पात्र शिक्षक मौजूद हैं, इसके बावजूद एक अस्थायी शिक्षक को कार्यवाहक प्रिंसिपल बनाना मदरसा नियमावली और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रतिकूल है। खालिद अली पर पूर्व में छात्रों के साथ अनुशासनहीनता, शारीरिक दंड, कक्षा से बाहर निकालने, भय और दबाव बनाने तथा अभिभावकों को धमकाने जैसे गंभीर आरोप भी लगते रहे हैं। इसके साथ ही समिति के कुछ सदस्यों से सांठगांठ कर उनके परिजनों को नौकरी दिलाने का प्रलोभन देने के आरोप भी सामने आए हैं।
इस पूरे प्रकरण पर आपत्ति जताते हुए समिति के अन्य सदस्य शौकत अली, नूरुलऐन, जैनुद्दीन, अफजल एवं नूरुलऐन ने सवाल उठाया है कि जब प्रबंधन समिति की सूची ही वैधानिक रूप से पंजीकृत नहीं है, तो बैठक किस अधिकार क्षेत्र में की गई और किस नियम के तहत कार्यवाहक प्रिंसिपल का नामांकन दर्शाया गया।
उपलब्ध तथ्यों से यह संकेत मिलता है कि प्रबंधक आबिद अली, अध्यक्ष जमशेर और शिक्षक खालिद अली की कथित मिलीभगत से मदरसे को नियमों के विपरीत संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर और विधिसम्मत कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

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