उप्र भूमि विकास बैंक चुनाव: गोपनीयता, वर्चस्व और निर्विरोध कराने के आरोपों के बीच सवालों में प्रक्रिया

रिपोर्ट – मनोज कुमार तिवारी 

उत्तर प्रदेश राज्य सहकारी समिति निर्वाचन आयोग के निर्वाचन आयुक्त राजमणि पांडेय द्वारा उप्र भूमि विकास बैंक लिमिटेड के शाखा प्रतिनिधियों एवं प्रबंध कमेटी के निर्वाचन का कार्यक्रम आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। घोषित कार्यक्रम के अनुसार बैंक के शाखा प्रतिनिधियों के निर्वाचन की प्रक्रिया 15 जनवरी से प्रारंभ हो चुकी है। मतदाता सूची पर प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण करते हुए अंतिम मतदाता सूची का प्रदर्शन 19 जनवरी को किया गया, जबकि नाम निर्देशन प्रपत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 20 जनवरी निर्धारित की गई है। नाम निर्देशन प्रपत्रों का परिनिरीक्षण एवं वैध नाम निर्देशन का प्रदर्शन 21 जनवरी को होगा। इसके पश्चात नाम निर्देशन वापस लेने एवं अंतिम नाम निर्देशन का प्रदर्शन किया जाएगा।

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चुनाव चिन्हों का आवंटन 22 जनवरी को अपराह्न तीन बजे से पांच बजे के बीच किया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो 27 जनवरी को मतदान कराया जाएगा और उसी के बाद निर्वाचन परिणामों की घोषणा की जाएगी। इसी क्रम में प्रबंध कमेटी के सदस्यों के निर्वाचन की तिथियां भी घोषित कर दी गई हैं। कार्यक्रम के अनुसार अंतिम मतदाता सूची का प्रदर्शन 6 फरवरी को होगा, आपत्तियां दाखिल करने की तिथि 9 फरवरी तय की गई है। मतदाता सूची पर प्राप्त आपत्तियों का निस्तारण एवं अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 10 फरवरी को किया जाएगा। नाम निर्देशन प्रपत्र 11 फरवरी को दाखिल किए जाएंगे, जिनका परिनिरीक्षण एवं वैध नाम निर्देशन का प्रदर्शन 12 फरवरी को होगा। नाम निर्देशन वापसी, अंतिम नाम निर्देशन का प्रकाशन एवं चुनाव चिन्हों का आवंटन 13 फरवरी को किया जाएगा। मतदाता सूची से संबंधित आपत्तियों एवं उनके निस्तारण की प्रक्रिया 17 फरवरी को पूरी करते हुए इसी दिन मतदान एवं परिणामों की घोषणा की जाएगी। एआर कोआपरेटिव डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि निर्वाचन से जुड़ा पूरा शेड्यूल जारी कर दिया गया है।

हालांकि, जनपद महाराजगंज में इस चुनाव को लेकर जिस तरह की गोपनीयता बरती जा रही है, उसने पूरी प्रक्रिया को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। 20 जनवरी को नामांकन की तिथि होने के बावजूद न तो संभावित प्रत्याशियों में कोई गतिविधि दिखाई दे रही है और न ही आम सहकारी सदस्यों को इसकी समुचित जानकारी मिल पा रही है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि गोपनीयता इतनी अधिक है कि अधिकांश लोगों को चुनाव की वास्तविक स्थिति का अंदाजा तक नहीं लग पा रहा।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि पिछले लगभग 30 वर्षों से एलडीबी बैंक निचलौल के चुनावों पर एक ही परिवार का वर्चस्व बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बार यह चुनाव कथित रूप से सरकार के संरक्षण में निर्विरोध संपन्न करा दिया जाता है। आरोप है कि इस बार भी वही रणनीति अपनाई जा रही है, ताकि किसी अन्य दावेदार को चुनावी मैदान में उतरने का अवसर न मिल सके।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह चुनाव खासा संवेदनशील माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के बावजूद तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष एवं वर्तमान में प्रभावशाली नेता पंकज चौधरी का दबदबा स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। चर्चाएं हैं कि इसी राजनीतिक प्रभाव के चलते फिर उसी परिवार को बैंक की सत्ता सौंपने के लिए पूरी बिसात पहले से बिछा दी गई है और चुनाव को निर्विरोध कराने का कथित षड्यंत्र रचा जा चुका है।

जनपद महाराजगंज के निचलौल,  महराजगंज, फरेंदा और नौतनवा क्षेत्रों में चल रही चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। पारदर्शिता, निष्पक्षता और सहकारी लोकतंत्र की मूल भावना को लेकर संदेह गहराता जा रहा है। अब देखना यह है कि निर्वाचन आयोग और प्रशासन इन आरोपों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या यह चुनाव वास्तव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुरूप संपन्न हो पाता है या फिर यह भी बीते वर्षों की तरह आरोपों और विवादों में ही सिमट कर रह जाता है।

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