रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी
महराजगंज।
जनपद महराजगंज के निचलौल क्षेत्र स्थित नवीन मण्डी स्थल गढ़ौरा पैट एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार मामला सिर्फ अनियमित दुकान आवंटन तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे मण्डी तंत्र में फैले संगठित भ्रष्टाचार, दलाली और नेपाल से होने वाली तस्करी के संरक्षण तक जा पहुँचा है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार मनोज कुमार तिवारी ने राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद, लखनऊ को पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की परत-दर-परत जांच की मांग की है।

शिकायत में सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि शासनादेशों को ताक पर रखकर तत्कालीन आवंटन समिति ने एक ही परिवार के तीन-तीन सदस्यों को दुकानें आवंटित कर दीं। सवाल यह है कि जब नियम स्पष्ट हैं कि एक परिवार को एक ही दुकान दी जानी चाहिए, तो यह खुला उल्लंघन किसके संरक्षण में हुआ?
इतना ही नहीं, शिकायत के अनुसार अन्य जनपदों के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को भी दो-दो दुकानें आवंटित की गईं, जबकि स्थानीय पात्र व्यापारियों को जानबूझकर बाहर कर दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि मण्डी आवंटन प्रक्रिया में “पहले आवेदन, फिर पात्रता” नहीं बल्कि “पहले पहचान, फिर दुकान” का फार्मूला लागू किया गया।
खोजी शिकायत में यह भी सामने आया है कि जिन लोगों के नाम से दुकानें आवंटित हुईं, उन्होंने स्वयं कोई व्यापार नहीं किया, बल्कि मोटी रकम लेकर दुकानों की अवैध बिक्री या ऊँचे किराये पर उठान कर दिया। यह पूरा खेल बिना मण्डी प्रशासन की मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा।
सबसे गंभीर और राष्ट्रहित से जुड़ा आरोप नेपाल से होने वाली तस्करी का है। शिकायत के अनुसार मण्डी परिषद के कुछ अधिकारी और कर्मचारी “सेफ ज़ोन” की आड़ में तस्करी की वस्तुओं को मण्डी पास जारी कर संरक्षण दे रहे हैं। सीमावर्ती जनपद होने के कारण यह मामला सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
प्रश्न यह उठता है कि क्या मण्डी परिषद के उच्च अधिकारी इन गतिविधियों से अनजान हैं, या फिर सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है? यदि निष्पक्ष जांच होती है तो कई अधिकारी और तथाकथित लाभार्थी बेनकाब हो सकते हैं।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि नियम विरुद्ध आवंटित सभी दुकानों को तत्काल निरस्त किया जाए, दोषी अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज हो और नेपाल तस्करी से जुड़े नेटवर्क की भी जांच कराई जाए।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शासन और मण्डी परिषद इस गंभीर शिकायत पर ठोस कार्रवाई करती है या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।