रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी
महराजगंज जनपद के सिसवा विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत सोनबरसा में लंबे समय से चल रहा विवाद आखिरकार जिला प्रशासन के अंतिम आदेश के साथ समाप्त हो गया। ग्राम प्रधान श्रीमती संतरा देवी के खिलाफ शासकीय धन के दुरुपयोग को लेकर की गई शिकायतें जांच में असत्य और आधारहीन पाई गईं। जिलाधिकारी महराजगंज द्वारा 28 जनवरी 2026 को जारी आदेश में प्रधान के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर लगाया गया प्रतिबंध निरस्त कर दिया गया है। इस फैसले को ग्राम प्रधान की “न्यायिक जीत” के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत सोनबरसा के निवासी संजय निषाद ने 13 दिसंबर 2024 को शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें ग्राम पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर धनराशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। शिकायत के बाद प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए प्रारंभिक जांच कराई, जिसमें कुछ बिंदुओं पर अनियमितता की आशंका जताई गई थी। इसी आधार पर ग्राम प्रधान और सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए तथा दिसंबर 2025 में प्रधान के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिए गए थे।
हालांकि, अंतिम और विस्तृत जांच में सच्चाई कुछ और ही सामने आई। जांच नियमावली 1997 के तहत गठित संयुक्त जांच टीम, जिसमें सहायक निदेशक मत्स्य और लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता शामिल थे, ने मौके पर जाकर सभी कार्यों की भौतिक सत्यापन किया। जांच आख्या में स्पष्ट किया गया कि जिन नाली, खड़ंजा, पंचायत भवन कायाकल्प और स्ट्रीट लाइट कार्यों को कागजों में फर्जी बताया जा रहा था, वे वास्तविक रूप से कराए गए थे।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, नाली और खड़ंजा निर्माण व मरम्मत कार्य मौके पर मौजूद पाए गए। यह भी उल्लेख किया गया कि कार्यों को हुए लगभग दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, इस कारण कई स्थानों पर क्षति दिखाई दे रही है, जिसे गलत तरीके से “कार्य न होना” बताकर शिकायत में शामिल किया गया। ग्राम सचिवालय में रंगाई-पुताई, फर्श टाइल्स और कायाकल्प का कार्य भी जांच में सही पाया गया और भुगतान तकनीकी मूल्यांकन (एमबी) के अनुसार होना बताया गया।
फॉगिंग और स्ट्रीट लाइट के मामले में भी जांच अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत बिल, बाउचर और तकनीकी अभिलेखों के आधार पर भुगतान किया गया था। स्ट्रीट लाइट के संबंध में यह भी कहा गया कि समय बीतने और असामाजिक तत्वों के कारण कई लाइटें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे यह भ्रम पैदा हुआ कि लाइटें लगाई ही नहीं गई थीं।
जांच में एक अहम तथ्य यह भी सामने आया कि जिन कार्यों को लेकर शिकायत की गई थी, उनमें से अधिकांश पूर्व प्रधान और पूर्व सचिव के कार्यकाल से संबंधित थे। वर्तमान पंचायत सचिव की तैनाती जनवरी 2024 में हुई थी, जबकि विवादित कार्य 2022-23 के थे। ऐसे में वर्तमान प्रधान और सचिव को जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं पाया गया।
इन सभी तथ्यों के आधार पर जांच अधिकारी ने शिकायत को निराधार बताते हुए किसी भी प्रकार के वित्तीय दुरुपयोग की पुष्टि नहीं की। जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने जांच आख्या का परीक्षण करने के बाद प्रधान पर लगाया गया प्रतिबंध निरस्त कर दिया और आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया।
इस निर्णय के बाद ग्राम पंचायत सोनबरसा में प्रधान समर्थकों में खुशी की लहर है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से चल रही जांच और कार्रवाई से विकास कार्य प्रभावित हो रहे थे, लेकिन अब प्रशासनिक स्पष्टता आने से गांव के विकास को गति मिलेगी। वहीं, यह मामला पंचायत स्तर पर शिकायतों की निष्पक्ष जांच और सत्य के आधार पर निर्णय का एक अहम उदाहरण बनकर सामने आया है।