महराजगंज जनपद में वित्तविहीन विद्यालयों से अवैध रूप से शुल्क वसूले जाने का गंभीर मामला सामने आने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस जांच न होना, शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्वतंत्र पत्रकार मनोज कुमार तिवारी द्वारा इस प्रकरण को लेकर लगातार शिकायतें की गईं, किंतु संबंधित अधिकारियों की चुप्पी से यह मामला और अधिक संदिग्ध होता जा रहा है।
प्रार्थी के अनुसार, श्री प्रदीप कुमार शर्मा ने जिला विद्यालय निरीक्षक, महराजगंज के पद पर रहते हुए शासनादेश संख्या 1348/15.07.2015-शिक्षा अनुभाग-7 का उल्लंघन किया। आरोप है कि उन्होंने वित्तविहीन विद्यालयों से क्रीड़ा शुल्क, रेडक्रॉस शुल्क, स्काउट-गाइड शुल्क सहित अन्य मदों में अवैध वसूली कराई। जबकि स्पष्ट शासनादेश के अनुसार वित्तविहीन विद्यालयों से इस प्रकार की वसूली प्रतिबंधित है।

इस संबंध में मनोज कुमार तिवारी द्वारा साक्ष्यों सहित दिनांक 07 अप्रैल 2025 एवं 23 जुलाई 2025 को अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा श्री पार्थी सेन शर्मा को लिखित शिकायतें भेजी गईं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय बीत जाने के बावजूद न तो जांच के आदेश हुए और न ही किसी प्रकार की विभागीय कार्यवाही की गई। इससे यह आशंका प्रबल हो जाती है कि जिला विद्यालय निरीक्षक को उच्च स्तर से संरक्षण प्राप्त है।
प्रार्थी का कहना है कि यदि प्रारंभिक स्तर पर ही निष्पक्ष जांच कर ली जाती, तो न केवल दोषियों पर कार्यवाही होती बल्कि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर भी अंकुश लगाया जा सकता था। लेकिन कार्यवाही न होना यह दर्शाता है कि शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
अब इस पूरे प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को औपचारिक रूप से पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यह मामला केवल आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और छात्रों के हितों से भी जुड़ा हुआ है।
जनपद में यह चर्चा आम है कि यदि शासन स्तर से निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाती है, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। ऐसे में निगाहें अब मुख्य सचिव कार्यालय पर टिकी हैं कि क्या इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जाएंगे या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।