रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

फर्जी प्रमाणपत्र पर नियुक्ति का आरोप: महराजगंज में तीन शिक्षकों की जांच पर बीएसए का सहयोग नहीं, डीआईओएस ने निदेशक को भेजी रिपोर्ट
महराजगंज जनपद में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर शिक्षकों की नियुक्ति और उन्हें संरक्षण दिए जाने के गंभीर आरोपों को लेकर जांच प्रक्रिया उलझती नजर आ रही है। शिकायतकर्ता जावेद अहमद खान की ओर से की गई शिकायत के आधार पर चल रही जांच में आवश्यक अभिलेख उपलब्ध न कराने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस संबंध में गोरखपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) डॉ. अजय कांत सिंह ने शिक्षा निदेशक को विस्तृत आख्या भेजते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) महराजगंज के स्तर से सहयोग न मिलने की बात कही है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, आनन्दनगर निवासी जावेद अहमद खान ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू इंटर कॉलेज, बरगाहपुर लेहड़ा (महराजगंज) में कार्यरत तीन शिक्षक—संजय श्रीवास्तव, दिनेश चंद्र मिश्रा और कैलाश यादव—की नियुक्ति कथित रूप से कूटरचित एवं फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर की गई है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि उस समय की जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रिद्धि पाण्डेय तथा कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक यशवंत सिंह द्वारा इन शिक्षकों को संरक्षण दिया गया।

इस मामले में शिक्षा निदेशालय ने 1 अक्टूबर 2025 को गोरखपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक को जांच अधिकारी नामित करते हुए विस्तृत जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। जांच अधिकारी द्वारा नवंबर 2025 में संबंधित शिक्षकों और विभागीय अधिकारियों से 11 बिंदुओं पर अभिलेख मांगे गए थे, लेकिन निर्धारित समय सीमा के बाद भी कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया।
बाद में तत्कालीन प्रभारी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी/जिला विद्यालय निरीक्षक महराजगंज की ओर से 26 नवंबर 2025 को एक आख्या भेजी गई, जिसमें बताया गया कि संबंधित मामला उच्च न्यायालय में लंबित होने के कारण जांच स्थगित कर दी गई है। हालांकि डीआईओएस गोरखपुर ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि जिन याचिकाओं का हवाला देकर जांच रोकी गई, उनमें से एक याचिका पहले ही 12 मार्च 2025 को खारिज हो चुकी है, जबकि दूसरी याचिका अभी विचाराधीन है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि कई बार पत्र भेजकर अभिलेख मांगे जाने के बावजूद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी महराजगंज की ओर से कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे जांच प्रक्रिया बाधित हो रही है। डीआईओएस ने शिक्षा निदेशक से अनुरोध किया है कि वे अपने स्तर से बीएसए महराजगंज को आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित करें या फिर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करें।
उधर, बीएसए महराजगंज की ओर से भेजी गई आख्या में बताया गया है कि इस मामले से जुड़े कुछ प्रकरण पहले से न्यायालय में विचाराधीन हैं। विशेष रूप से शिक्षक कैलाश यादव के बीएड अंकपत्र से संबंधित मामले में एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर उनका वेतन रोका गया था, जिसके खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने 12 दिसंबर 2023 को आदेश देते हुए संबंधित आदेशों के प्रभाव को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया था।
फिलहाल पूरे प्रकरण में अभिलेखों के अभाव और न्यायालय में लंबित मामलों के कारण जांच अधर में लटकी हुई है। अब देखना होगा कि शिक्षा निदेशालय इस संवेदनशील मामले में क्या निर्णय लेता है और आरोपों की सच्चाई सामने लाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।