रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी जिलों में मदरसों में कार्यरत शिक्षण एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों को दी गई स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के मामलों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इस संबंध में परिषद की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही द्वारा सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक सूचनाएं तलब की गई हैं।
यह कार्रवाई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में दर्ज एक मामले (केस संख्या 25655/24/0/2026) के तहत की जा रही है, जिसमें शिकायतकर्ता ने मदरसों में कर्मचारियों को वीआरएस देने की प्रक्रिया और नियमों के पालन पर सवाल उठाए हैं। आयोग ने इस विषय में राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है, जिसके अनुपालन में यह कदम उठाया गया है।

जारी पत्र के अनुसार, जिलों से उन सभी कर्मचारियों का विवरण मांगा गया है जिन्हें पिछले वर्षों में वीआरएस या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति दी गई है। इसमें कर्मचारी का नाम, पद, संबंधित मदरसे का नाम, सेवानिवृत्ति की तिथि और उत्तर प्रदेश मदरसा मान्यता प्रशासन एवं सेवा विनियमावली 2016 के तहत की गई कार्यवाही का पूरा ब्यौरा शामिल है।
इसके अलावा, यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी को सुनवाई का अवसर दिया गया था या नहीं तथा यदि किसी मामले में नियमों का पालन नहीं हुआ, तो उसके पीछे के कारण क्या थे। परिषद ने निर्देश दिया है कि सभी सूचनाएं निर्धारित समय सीमा में उपलब्ध कराई जाएं, अन्यथा इसकी जिम्मेदारी संबंधित जिला अधिकारियों की होगी।
इस आदेश के बाद प्रदेशभर में मदरसों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।