रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी
उत्तर प्रदेश शासन ने पंचायत चुनावों एवं स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्गों के अधिकारों को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है। पंचायतीराज अनुभाग-3 द्वारा 20 मई 2026 को जारी इस अधिसूचना के अनुसार, आयोग का गठन प्रारंभिक रूप से छह माह की अवधि के लिए किया गया है, जो अपने गठन के दिनांक से प्रभावी होगा।
इस आयोग के अध्यक्ष पद पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति श्री राम औतार सिंह को नियुक्त किया गया है। वहीं, आयोग में सदस्य के रूप में सेवानिवृत्त अपर जिला न्यायाधीश श्री बृजेश कुमार और श्री संतोष कुमार विश्वकर्मा को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया तथा श्री एस.पी. सिंह को भी सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।
शासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के मानदेय, भत्तों और अन्य सुविधाओं के संबंध में अलग से आदेश जारी किए जाएंगे। यह आयोग राज्य में पंचायत एवं अन्य ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्गों के आरक्षण और प्रतिनिधित्व से जुड़े मामलों का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
गौरतलब है कि पंचायत चुनावों में पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर पूर्व में न्यायिक हस्तक्षेप के बाद इस तरह के आयोग के गठन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। ऐसे में सरकार का यह कदम आगामी पंचायत चुनावों के लिए अहम माना जा रहा है। आयोग की सिफारिशें भविष्य की आरक्षण नीति और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।