Pardafas News 24 ×7
ठूठीबारी/महराजगंज। नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और जलप्रलय ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। त्रिशूली नदी समेत कई नदियों के उफान पर आने से भारी तबाही मची। नदी किनारे बसे घरों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा, वहीं बड़ी संख्या में लोग अपने परिवारों से बिछड़ गए। किसी का आशियाना उजड़ गया तो किसी के घर का सदस्य लापता हो गया। अब प्रभावित परिवारों की निगाहें अपनों की सकुशल वापसी पर टिकी हुई हैं।
आपदा के बाद नेपाल के कई इलाकों में दर्दनाक मंजर देखने को मिल रहा है। राहत और बचाव कार्य जारी रहने के बावजूद कई परिवार ऐसे हैं, जिनकी बेचैनी कम नहीं हो रही। लापता परिजनों की तलाश में लोग लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान तक भटक रहे हैं और हर नई सूचना में अपनों की खबर तलाश रहे हैं।
किसी को अपने माता-पिता की चिंता सता रही है तो कोई भाई, बहन, पति, पत्नी, बेटी या बेटे की वापसी का इंतजार कर रहा है। राहत शिविरों और अस्पतालों के आसपास भी परिजन उम्मीद लगाए बैठे हैं। हर गुजरते वाहन, हर फोन कॉल और हर आने वाली सूचना पर उनकी निगाहें टिक जाती हैं कि शायद कहीं से उनके अपने की खबर मिल जाए।
प्राकृतिक आपदा ने प्रभावित परिवारों को ऐसी पीड़ा दी है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी। कई लोगों ने अपना घर, रोजगार और अपनों को खो दिया है। इस त्रासदी ने एक बार फिर यह दिखाया है कि प्रकृति का कहर किसी सीमा को नहीं पहचानता।
नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत की ओर से भी मानवीय सहयोग और आवश्यक मदद पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारत-नेपाल सीमा भले ही दो देशों को अलग करती हो, लेकिन इंसानियत का रिश्ता सीमाओं से कहीं बड़ा है। संकट की इस घड़ी में दोनों देशों के लोगों के बीच सहयोग और संवेदना की भावना ही सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आ रही है।