महराजगंज। स्वतंत्र पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता मनोज कुमार तिवारी द्वारा 24 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को भेजी गई शिकायत में अपर पुलिस महानिदेशक, कानून एवं व्यवस्था अमिताभ यश के प्रभाव का हवाला देते हुए कथित प्रताड़ना और भविष्य में अप्रिय घटना की आशंका जताई गई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि एक खबर प्रकाशित किए जाने के बाद विवाद उत्पन्न हुआ और राजनीतिक एवं पुलिस प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें धमकाया तथा खबर हटाने का दबाव बनाया गया।
शिकायतकर्ता ने 24 जुलाई 2026 को पत्र भेजकर और 17 अगस्त 2026 को शासन को अनुस्मारक भेज कर जांच की मांग किया। इसके जवाब में गृह (पुलिस सेवायें) अनुभाग-2, उत्तर प्रदेश शासन ने 15 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में समुचित साक्ष्य और शपथ-पत्र उपलब्ध कराने को कहा। शासन ने अपने पत्र में कार्मिक विभाग के 9 मई 1997 के शासनादेश का हवाला देते हुए कहा कि अन्य स्रोतों से प्राप्त शिकायतों में शिकायतकर्ता से शिकायत की पुष्टि के लिए साक्ष्य और शपथ-पत्र प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाए।

इसी बीच उपलब्ध दस्तावेजों में एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आता है। अपर जिला मजिस्ट्रेट (न्यायिक), महराजगंज के न्यायालय से जारी कारण बताओ नोटिस में वाद संख्या D 202605470001338 के तहत मनोज तिवारी के विरुद्ध उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, 1970 की धारा 3/4 के तहत कार्रवाई का उल्लेख है।
नोटिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक महराजगंज की आख्या 30 जुलाई 2026, जबकि थानाध्यक्ष निचलौल, क्षेत्राधिकारी निचलौल, अपर पुलिस अधीक्षक महराजगंज और उप जिलाधिकारी निचलौल की संस्तुतियां 28 जुलाई 2026 की बताई गई हैं। न्यायालयीय नोटिस में पुलिस की ओर से मनोज तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं तथा पूर्व के कई मुकदमों और 21 जुलाई 2026 की बीट सूचना रिपोर्टों का उल्लेख किया गया है। ये आरोप पुलिस की आख्या में दर्ज हैं, स्वयं सिद्ध न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
खास बात यह है कि शिकायतकर्ता की ओर से 24 जुलाई को शासन को भेजे गए पत्र में भविष्य में प्रताड़ित किए जाने की आशंका जताई गई थी, जबकि उपलब्ध गुंडा एक्ट संबंधी दस्तावेजों में पुलिस की रिपोर्ट और संस्तुतियां 28 जुलाई तथा पुलिस अधीक्षक की आख्या 30 जुलाई की दर्ज हैं।