“महराजगंज में धान खरीद पर बड़ा सवाल: नियमों के बावजूद राइस मिलों में अनएकाउंटेड धान का भंडारण, लोकायुक्त जांच तेज”

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा धान खरीद और सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की डिलीवरी को पारदर्शी बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं, जिनमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिला प्रशासन, खाद्य विभाग और मंडी परिषद प्रत्येक 10 दिनों पर चावल मिलों का अनिवार्य निरीक्षण करेंगे। नियम 29.3 के अनुसार, किसी भी राइस मिल में अनएकाउंटेड धान या चावल पाए जाने पर मिलर के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्यवाही की जानी चाहिए।

 

इसके बावजूद जनपद महराजगंज में कई राइस मिलों पर नियमों की खुलेआम अनदेखी देखी जा रही है। विशेषकर निचलौल तहसील के ग्राम कपिया स्थित एक राइस मिल में बड़े पैमाने पर किसानों से सस्ते दाम पर धान खरीदकर गोदामों में भंडारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह धान बाद में सरकारी खरीद बताकर, सरकारी रेट पर बेचकर भारी वित्तीय गड़बड़ी की जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार, प्राइवेट खरीद के लिए ‌राइस मिलरो ने GST और फॉर्म किसी दुसरे नाम से बनवाने की प्रक्रिया पुर्ण कर ली है ताकि रिकॉर्ड में हेरफेर करके उसी के आंड में सरकारी खरीद दिखाया जा सके। और प्राइवेट में किसानों से खरिदा धन उसी किसान से अंगूठा भी उनसे जुड़े एजेंसी केंद्रों पर स्कैन करा लिया जाता है, जिससे बाद में कागजी साक्ष्य मिलर के पक्ष में तैयार हो जाते हैं। यह सम्पूर्ण कार्रवाई नियमों और शासनादेश का घोर उल्लंघन है।

जब इस संदर्भ में जिला खाद्य विपणन अधिकारी विवेक सिंह से बात की गई तो उन्होंने किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इनकार कर दिया और कहा कि “खरीद की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की जा रही है।” उनका यह बयान तब आया है जब लोकल स्तर पर लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि मिलों में अनएकाउंटेड धान का भंडारण चल रहा है।

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फिलहाल लोकायुक्त की टीम महराजगंज में भी धान खरीद प्रक्रिया की जांच कर रही है, और माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो कई राइस मिलों के खिलाफ अनुबंध निरस्तीकरण, लाइसेंस रद्दीकरण से लेकर राजस्व वसूली तक की कार्यवाही के साथ सम्बंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी गाज गिरने संभव है।

सरकारी धान कुटाई का अनुबंध प्राप्त राइस मिलों द्वारा बड़े पैमाने पर निजी धान खरीदना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सरकारी खरीद प्रणाली को भी कठघरे में खड़ा करता है। यह देखना अब महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद जिम्मेदार अधिकारियों एवं मिल संचालकों पर क्या कार्रवाई होती है।

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