महराजगंज जनपद में मनरेगा सोशल ऑडिट व्यवस्था पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए जब सोशल ऑडिट के नाम पर धन मांगने का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल वीडियो में नौतनवां क्षेत्र की बी-सैक (ब्लॉक सोशल ऑडिट कोऑर्डिनेटर) सुश्री रेनू सिंह को एक ग्राम प्रधान से कथित रूप से धनराशि की मांग करते हुए देखा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए सोशल ऑडिट निदेशालय, ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
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सोशल ऑडिट निदेशालय द्वारा जारी पत्र संख्या 1432/सो.आ.नि.-462/2025 दिनांक 16 दिसंबर 2025 के अनुसार, व्हाट्सएप के माध्यम से प्राप्त शिकायती वीडियो और प्रकरण का प्रथम दृष्टया अवलोकन करने पर यह स्पष्ट हुआ है कि सोशल ऑडिट जैसी पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली प्रक्रिया के दौरान धन की मांग की जा रही है, जो अत्यंत खेदजनक और नियमों के विरुद्ध है।

निदेशक सोशल ऑडिट, उत्तर प्रदेश द्वारा जिलाधिकारी महराजगंज को भेजे गए पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सुश्री रेनू सिंह को अग्रिम आदेश तक सोशल ऑडिट कार्य से विरत किया जाए। साथ ही, प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर अधिकतम 15 दिनों के भीतर जांच पूर्ण कर आख्या उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगे की विधिक व विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसे मनरेगा सोशल ऑडिट प्रणाली में “पहली बड़ी कार्रवाई” के रूप में देखा जा रहा है। सोशल ऑडिट का उद्देश्य ही भ्रष्टाचार पर रोक लगाना और योजनाओं में पारदर्शिता लाना है, ऐसे में उसी व्यवस्था से जुड़े अधिकारी पर रिश्वत मांगने का आरोप पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सूत्रों के अनुसार, वायरल वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। जनपद स्तर पर जांच समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी सोशल ऑडिट के नाम पर अवैध वसूली करने का साहस न कर सके।
अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी द्वारा गठित की जाने वाली जांच समिति और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि सोशल ऑडिट प्रणाली पर लगे इस गंभीर आरोप की सच्चाई क्या है और आगे कौन-कौन सी कार्रवाई होगी।