महराजगंज।
जनपद महाराजगंज के निचलौल विकास खंड अंतर्गत बसूली ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। NMMS ऐप के माध्यम से दर्ज की गई उपस्थिति ने यह साफ कर दिया है कि यहां योजनाओं का लाभ मजदूरों तक पहुंचने के बजाय कागजों और डिजिटल एंट्री के जरिये सरकारी धन के दुरुपयोग में लगाया जा रहा है। यह कोई पहली बार नहीं है, बल्कि हर बार की तरह इस बार भी बसूली ग्राम सभा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।

कार्य कोड 3152003/RC/958486255823716408 के अंतर्गत चकबंद निर्माण कार्य दिखाते हुए कुल 16 मस्टररोल बनाए गए हैं।

इन मस्टररोलों में कुल 143 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जबकि मौके पर केवल 10 से 12 मजदूर ही काम करते हुए देखे गए। हैरानी की बात यह है कि लगभग हर मस्टररोल में 10-10 मानव दिवस दर्शाए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उपस्थिति जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई है।

NMMS ऐप पर अपलोड की गई समूह फोटो भी कई सवाल खड़े करती हैं। अधिकांश मस्टररोल में दूसरी फोटो अपलोड नहीं की गई, जो मनरेगा के नियमों का सीधा उल्लंघन है। एक ही कार्य, एक ही स्थान और लगभग समान समय पर अलग-अलग मस्टररोल में अलग-अलग मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई है। फोटो ग्राम पंचायत स्तर की कर्मचारी शिरोमणि देवी के लॉगिन से अपलोड की गई हैं, जिससे प्रशासनिक जिम्मेदारी भी संदेह के घेरे में है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए प्रतिदिन लगभग ₹36,000 का गबन किया जा रहा है। 10–12 मजदूरों के सहारे 143 मजदूरों की डिजिटल हाजिरी दिखाना न केवल गंभीर अपराध है, बल्कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना की मूल भावना के साथ खुला खिलवाड़ है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, सीडीओ और उच्चस्तरीय जांच एजेंसियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे डिजिटल घोटालों पर रोक लग सके।