NMMS ऐप के जरिए मनरेगा में महाघोटाला: सिसवा ब्लॉक की मुंडेरी ग्रामसभा में फर्जी हाजिरी से रोज़ 55 हजार से अधिक का गबन

रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी पर्दाफाश न्यूज़ 

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जनपद अंतर्गत सिसवा विकासखंड की ग्रामसभा मुंडेरी में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एनएमएमएस (NMMS) ऐप के जरिए दर्ज की जा रही दैनिक उपस्थिति में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मौके पर मजदूरों की वास्तविक मौजूदगी के बिना ही सरकारी धन का भुगतान किया जा रहा है।

 

दस्तावेजों और ऐप में उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार मुंडेरी ग्रामसभा में एक ही दिन अलग-अलग पांच स्थानों पर कार्य दिखाए गए हैं। इन कार्यों में चकरोड़ पर मिट्टी कार्य, इंटरलॉकिंग, बंधा निर्माण जैसे कार्य शामिल हैं। प्रत्येक कार्य में 10-10 मजदूरों की उपस्थिति दर्शाई गई है, जबकि ग्रुप फोटो में दिखाई देने वाले चेहरे गिने-चुने और लगभग एक जैसे हैं। जांच करने पर सामने आया कि मुश्किल से 20 से 25 व्यक्तियों की तस्वीरें लेकर उन्हें 24 मास्टर रोल में बार-बार अपलोड किया गया है और करीब 220 मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगा दी गई है।

सबसे गंभीर तथ्य यह है कि एक ही व्यक्ति की फोटो को अलग-अलग कार्य स्थलों और अलग-अलग मास्टर रोल में अपलोड किया गया है। इससे यह साफ होता है कि न तो सभी कार्य एक साथ हो रहे थे और न ही जिन मजदूरों के नाम और जॉब कार्ड नंबर दर्ज हैं, वे वास्तव में मौके पर मौजूद थे। कई मजदूरों के नाम ऐसे हैं, जिनके परिजनों का कहना है कि वे उस दिन काम पर गए ही नहीं थे।

सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा खेल क्षेत्र पंचायत स्तर से कराए जा रहे कार्यों में अधिक देखने को मिल रहा है। आरोप है कि डीसी मनरेगा, एपीओ सिसवा और खंड विकास अधिकारी की मिलीभगत से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जा रहा है। एनएमएमएस ऐप, जिसे पारदर्शिता के लिए लागू किया गया था, उसी का दुरुपयोग कर रोज़ाना लगभग 55,440 रुपये का सरकारी धन गबन किया जा रहा है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्वतंत्र एजेंसी से ग्रुप फोटो, जियो-कोऑर्डिनेट, टाइम-स्टैम्प और चेहरों का मिलान कराया जाए तो पूरा घोटाला बेनकाब हो जाएगा। एक ही दिन, एक ही समयावधि में अलग-अलग स्थानों पर एक जैसे चेहरे इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाया जा रहा है।

अब सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों हैं। यदि समय रहते उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो मनरेगा में पारदर्शिता का दावा सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित रह जाएगा।

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