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महराजगंज जनपद के विकास खण्ड सिसवा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक ही मजदूर की फोटो को अलग-अलग कार्य स्थलों के मस्टर रोल में लगाकर फर्जी हाजिरी दर्शाई जा रही है, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस संबंध में एक सामाजिक कार्यकर्ता व स्वतंत्र पत्रकार ने ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश के आयुक्त को लिखित शिकायत भेजकर मनरेगा एक्ट-2009 के प्रावधानों के तहत निष्पक्ष जांच की मांग की है।

शिकायत में बताया गया है कि बीते एक माह से अधिक समय से सिसवा विकास खण्ड की क्षेत्र पंचायत एवं कई ग्राम पंचायतों में यह अनियमितता लगातार की जा रही है। आरोप है कि चुनिन्दा कार्यों और मजदूरों की तस्वीरों का बार-बार उपयोग कर अलग-अलग मस्टर रोल तैयार किए गए हैं। इससे यह संदेह गहराता है कि वास्तविक मजदूरों को काम और मजदूरी से वंचित कर कागजी कार्यवाही के जरिए भुगतान निकाला जा रहा है।
शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम पंचायत मुड़ेरी, हरपुर पकड़ी, मथनिया, गोपाला, लक्ष्मीपुर एकडंगा सहित अन्य पंचायतों में भी इसी तरह का कूटरचित और फर्जीवाड़ा सामने आया है। यदि विगत एक माह के मस्टर रोल में लगे फोटो की फॉरेंसिक जांच कराई जाए तो सच्चाई स्वतः उजागर हो सकती है। इससे न केवल दोषियों की पहचान होगी बल्कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना की पारदर्शिता भी सुनिश्चित हो सकेगी।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस पूरे प्रकरण में जिले स्तर के संबंधित विभागों के कुछ अधिकारी भी संलिप्त हो सकते हैं। इसलिए मांग की गई है कि जांच प्रक्रिया से जनपद के सभी मनरेगा अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग रखा जाए, ताकि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच संभव हो सके। साथ ही दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कड़ी विधिक कार्रवाई की जाए।
यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल मनरेगा प्रणाली की खामियों को उजागर करेगा, बल्कि ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। अब देखना होगा कि शासन स्तर पर इस शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है और जांच कितनी पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ती है।