जनपद में विकास खंड निचलौल का यह ग्राम पंचायत फिर सुर्खियों में

रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी 

ग्राम पंचायत पकड़ी भारतखण्ड, विकास खण्ड निचलौल, जनपद महराजगंज में पंचायत व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। काफी लंबे समय से चले आ रहे “जाद्दो जहद” के बाद आखिरकार ग्राम पंचायत सदस्य वार्ड संख्या 13 से छोटेलाल यादव का त्यागपत्र औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। यह आदेश जिला पंचायत अध्यक्ष रविकान्त पटेल द्वारा दिनांक 13 फरवरी 2026 को पारित किया गया, जो तत्काल प्रभावी है।

उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत पकड़ी भारतखण्ड के कुल आठ सदस्यों—छोटेलाल यादव (वार्ड 13), छोटकन वर्मा (वार्ड 3), लखमुद्दीन अली (वार्ड 10), शांति देवी (वार्ड 7), सवरुन निशा (वार्ड 4), निशा भारती (वार्ड 8), विजय कुमार (वार्ड 9) और शैलेश प्रजापति (वार्ड 2)—द्वारा अलग-अलग समय पर इस्तीफा दिया गया था। इनमें से छोटेलाल यादव ने 3 नवंबर 2025 को ही अपना त्यागपत्र दे दिया था, लेकिन इसे स्वीकार करने में लगभग तीन महीने से अधिक का समय लगा। इस देरी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे अहम तथ्य यह है कि सदस्यों के इस्तीफे के बाद ग्राम पंचायत की कई वैधानिक समितियां अल्पमत में आ गई थीं। पंचायत नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में बिना समिति की बैठक और संस्तुति के किसी भी प्रकार का वित्तीय भुगतान अवैध माना जाता है। इसके बावजूद, आरोप है कि इसी अंतराल का फायदा उठाते हुए ग्राम पंचायत के खाते से ₹9,00,202 (नौ लाख दो सौ दो रुपये) की सरकारी धनराशि निकाल ली गई।

इस संबंध में पूर्व मनोनीत प्रधान छोटेलाल यादव द्वारा खण्ड विकास अधिकारी निचलौल को एक विस्तृत शिकायती पत्र दिया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ग्राम प्रधान सुनील कुमार गुप्ता और पंचायत सचिव राजीव कुमार रामचन्द्रम ने आपसी मिलीभगत से राज्य वित्त/पन्द्रहवां वित्त की धनराशि का दुरुपयोग किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रधान की बहाली के बाद ग्राम पंचायत में एक भी ग्राम सभा की बैठक नहीं हुई, न ही किसी समिति की संस्तुति ली गई।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब पंचायत सचिव से इस संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “ग्राम पंचायत में सदस्यों की कोई भूमिका नहीं होती, भुगतान मैं करता रहूंगा, जहां शिकायत करनी है कर दीजिए।” यह बयान पंचायत राज व्यवस्था की मूल भावना पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।

अब जबकि त्यागपत्र को आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है, यह स्पष्ट हो गया है कि लंबे समय तक इस्तीफों को लंबित रखना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संभावित रूप से एक सुनियोजित रणनीति भी हो सकती है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए त्रिस्तरीय जांच समिति गठित करने और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

यह मामला न केवल ग्राम पंचायत पकड़ी भारतखण्ड, बल्कि पूरे जिले में पंचायत राज व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर क्या ठोस कदम उठाता है, या फिर यह मामला भी कागज़ों में दबकर रह जाएगा।

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