महराजगंज में बनी अनोखी डिजिटल वसीयत: विनय कुमार पाण्डेय ने पत्नी को बनाया डिजिटल वारिस, वकील का दावा—देश की पहली पहल

रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी 

महराजगंज। तेजी से बढ़ते डिजिटल युग में अब लोगों की संपत्तियां केवल जमीन-जायदाद या बैंक खातों तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि सोशल मीडिया, ई-मेल, डिजिटल वॉलेट और क्लाउड स्टोरेज जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी व्यक्ति की महत्वपूर्ण डिजिटल संपत्ति बन चुके हैं। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में एक अनोखी पहल सामने आई है, जहां इन्दिरा नगर निवासी एडवोकेट विनय कुमार पाण्डेय ने अपनी डिजिटल संपत्तियों को लेकर एक डिजिटल वसीयत तैयार कराई है।

जानकारी के अनुसार, एडवोकेट विनय कुमार पाण्डेय पुत्र स्व. सुरेश चन्द्र पाण्डेय, निवासी जलकल रोड, नगर पालिका परिषद इन्दिरा नगर वार्ड संख्या 10, तहसील सदर, जनपद महराजगंज ने 13 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार के ई-स्टाम्प पर यह डिजिटल वसीयत तैयार कराई। उन्होंने अपनी पत्नी सुधा पाण्डेय को डिजिटल वारिस (Digital Executor) घोषित किया है। वसीयत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि उनके निधन के बाद उनकी धर्मपत्नी को उनकी सभी डिजिटल संपत्तियों के संचालन, उपयोग, बंद करने या आवश्यकतानुसार स्थानांतरित करने का पूरा अधिकार होगा।

वसीयत में विनय कुमार पाण्डेय ने अपनी प्रमुख डिजिटल संपत्तियों का विस्तृत उल्लेख किया है। इसमें सोशल मीडिया अकाउंट जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन, व्हाट्सएप आदि शामिल हैं। इसके अलावा ई-मेल अकाउंट जैसे जी-मेल, याहू मेल और आउटलुक का भी जिक्र किया गया है।

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इसके साथ ही उन्होंने वित्तीय डिजिटल संपत्तियों का भी विवरण दिया है, जिसमें पेटीएम, गूगल-पे, क्रिप्टो वॉलेट और विभिन्न ट्रेडिंग अकाउंट शामिल हैं। वसीयत में निर्देश दिया गया है कि इन खातों में मौजूद धनराशि को उनके बैंक खाते में या सीधे उनकी पत्नी सुधा पाण्डेय को स्थानांतरित किया जाए।

 

विनय कुमार पाण्डेय ने क्लाउड स्टोरेज से जुड़ी डिजिटल संपत्तियों का भी उल्लेख किया है, जैसे गूगल फोटो, आईक्लाउड और ड्रॉपबॉक्स। उन्होंने निर्देश दिया है कि इनमें सुरक्षित उनकी पारिवारिक तस्वीरें और वीडियो उनकी पत्नी के साथ साझा किए जाएं।

वसीयत में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनके सभी यूजरनेम और पासवर्ड की जानकारी एक सुरक्षित पासवर्ड मैनेजर या सीलबंद लिफाफे में रखी गई है, जिसे केवल उनके डिजिटल वारिस द्वारा ही खोला जाएगा। साथ ही उन्होंने अपनी विशेष इच्छा भी व्यक्त की है कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी डिजिटल पहचान का किसी भी प्रकार के अनैतिक या अवैध कार्य में उपयोग न किया जाए।

इस डिजिटल वसीयत के गवाह के रूप में रामकेवल शर्मा और विकास कुमार पाण्डेय के हस्ताक्षर दर्ज हैं। दस्तावेज तैयार करने वाले अधिवक्ता ने दावा किया है कि इस तरह की डिजिटल संपत्तियों को लेकर तैयार की गई वसीयत देश में अपनी तरह की पहली पहल हो सकती है।

यदि यह वसीयत विधिवत रूप से पंजीकृत हो जाती है, तो विनय कुमार पाण्डेय को देश का पहला डिजिटल वसीयतकर्ता और उनकी पत्नी सुधा पाण्डेय को पहली डिजिटल वसीयतग्राही के रूप में देखा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में डिजिटल संपत्तियों के बढ़ते महत्व को देखते हुए इस प्रकार की वसीयतें एक नई कानूनी परंपरा की शुरुआत कर सकती हैं।

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