रिपोर्ट – सुर्य प्रकाश तिवारी
गोरखपुर। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग महराजगंज में फर्जी नियुक्ति के गंभीर आरोपों ने वन विभाग में हलचल मचा दी है। मामले में तत्कालीन प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद अब विभागीय स्तर पर सतर्कता जांच शुरू कर दी गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश का कूटरचित एवं फर्जी तरीके से हवाला देकर नियुक्ति की गई।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब महराजगंज जनपद के ग्राम सिंहपुर निवासी मनोज कुमार तिवारी ने 7 नवंबर 2025 को मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को संबोधित एक विस्तृत शिकायत पत्र भेजा। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं विभागाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश द्वारा 25 फरवरी 2026 को मुख्य वन संरक्षक, गोरखपुर मण्डल को जांच अधिकारी नामित किया गया।
मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, गोरखपुर से जारी पत्र के अनुसार, संबंधित अधिकारी समूह ‘क’ श्रेणी के हैं, जिनके विरुद्ध जांच की प्रक्रिया शासन के निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत ही की जाएगी। शासनादेशों के मुताबिक, किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ प्राप्त शिकायत पर जांच प्रारंभ करने से पहले शिकायतकर्ता से शपथ पत्र एवं ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।
इसी क्रम में शिकायतकर्ता मनोज कुमार तिवारी को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी शिकायत की पुष्टि हेतु एक सप्ताह के भीतर शपथ पत्र और उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने के बाद ही औपचारिक जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
इस पूरे प्रकरण ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब उच्च न्यायालय जैसे संवेदनशील आदेशों के दुरुपयोग का आरोप सामने आया हो। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य कितने ठोस होते हैं और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। यह मामला न केवल विभागीय पारदर्शिता बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।