पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा दांव, आरक्षण से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई अहम फैसलों से सियासी हलचल तेज

रिपोर्ट -मनोज कुमार तिवारी 

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले योगी सरकार ने कई बड़े और अहम फैसले लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज कर दी है। राज्य कैबिनेट की बैठक में 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई, जिनका सीधा असर प्रदेश की सामाजिक संरचना, विकास कार्यों और आगामी पंचायत चुनावों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण फैसला पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर लिया गया है। सरकार ने एक समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी है, जो पंचायत स्तर पर पिछड़े वर्ग की वास्तविक हिस्सेदारी का अध्ययन करेगा और उसी आधार पर आरक्षण तय किया जाएगा। इसे सरकार का बड़ा सामाजिक और राजनीतिक कदम माना जा रहा है, जो चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। लखनऊ मेट्रो के विस्तार को हरी झंडी देते हुए चारबाग से बसंतकुंज तक नए कॉरिडोर को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लिए भी समझौते को स्वीकृति मिली है, जिससे राजधानी के दक्षिणी क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी। इसी क्रम में आगरा मेट्रो कॉरिडोर-2 के लिए भूमि हस्तांतरण और निर्माण कार्य को भी मंजूरी दी गई है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए लोहिया संस्थान में 1010 बेड के सुपर स्पेशियलिटी इमरजेंसी सेंटर के निर्माण को स्वीकृति दी है। साथ ही स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल के विस्तार का रास्ता भी साफ हो गया है, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।

शिक्षा और युवाओं को ध्यान में रखते हुए पशु चिकित्सा (वेटरनरी) छात्रों के इंटर्नशिप भत्ते को ₹4,000 से बढ़ाकर ₹12,000 कर दिया गया है। यह निर्णय युवाओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है।

इसके अलावा मिर्जापुर में ट्रांसमिशन लाइन और पूलिंग उपकेंद्र निर्माण, जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियमावली 2026 लागू करने, लोक सेवा आयोग संशोधन और सरदार पटेल एपेक्स यूनिवर्सिटी के निर्माण जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है।

कुल मिलाकर, योगी सरकार के ये फैसले एक तरफ विकास को गति देने वाले हैं, वहीं दूसरी ओर पंचायत चुनाव से पहले सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में भी देखे जा रहे हैं। इन निर्णयों के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस और समीकरण बनने की संभावना तेज हो गई है।

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