गोरखपुर मण्डल में वर्ष 2017 से 2024 के मध्य यूपी को-ऑपरेटिव युनियन द्वारा धान खरीद में हुए बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतों ने पूरे क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल पैदा कर दी है। इसी क्रम में लोक आयुक्त उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा महराजगंज निवासी मनोज कुमार तिवारी की ओर से प्रस्तुत परिवाद पर संज्ञान लेते हुए व्यापक जांच के निर्देश दिए गए। लोक आयुक्त कार्यालय के पत्र संख्या 1702-2025/04/9567 दिनांक 10 नवम्बर 2025 के अनुपालन में गोरखपुर मण्डल आयुक्त कार्यालय ने 27 नवम्बर 2025 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया।

जारी आदेश के अनुसार, महराजगंज जिले में धान खरीद एवं भुगतान व्यवस्था से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है, जिसमें मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी तथा मुख्य कोषाधिकारी, महराजगंज को शामिल किया गया है। समिति को निर्देशित किया गया है कि वह 15 दिसम्बर 2025 तक विस्तृत जांच आख्या प्रस्तुत करे, जिसे आगे उप लोक आयुक्त के समक्ष भेजा जा सके।

हालांकि इस आदेश के जारी होते ही निष्पक्ष जांच को लेकर कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। विशेषज्ञों तथा शिकायतकर्ता की ओर से तर्क दिया गया है कि धान एवं गेहूं खरीद की संपूर्ण वित्तीय तथा प्रशासकीय निगरानी का अधिकार सामान्यतः संबंधित जनपद के अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)ही प्राप्त होता है। ऐसे में उन्हीं अधिकारियों को जांच समिति में शामिल करना, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पूरे खरीद प्रक्रिया के प्रभारी रहते हैं, जांच की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
आलोचकों का कहना है कि यदि धान खरीद में किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है, तो उसकी जवाबदेही स्वाभाविक रूप से उन्हीं अधिकारियों पर होती है जिनकी जिम्मेदारी निरीक्षण, भुगतान सत्यापन और वित्तीय नियंत्रण की है। ऐसे में उन अधिकारियों के सम्मिलित होने से यह आशंका उठती है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं हो पाएगी।
इसी मुद्दे पर शिकायतकर्ता मनोज कुमार तिवारी ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि “जब वही अधिकारी समिति में होंगे जिन पर निगरानी की जिम्मेदारी थी, तो जांच कैसे निष्पक्ष हो सकती है?” उन्होंने मांग की है कि समिति में बाहरी जनपदों के वरिष्ठ अधिकारियों या किसी स्वतंत्र एजेंसी को शामिल किया जाए।
अब देखना यह है कि लोक आयुक्त कार्यालय इन आपत्तियों पर क्या रुख अपनाता है और क्या जांच समिति के गठन में कोई पुनर्विचार होता है। फिलहाल, पूरे गोरखपुर मण्डल—गोरखपुर, महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया—के हजारों किसानों और यूपी को-ऑपरेटिव यूनियन से जुड़े कर्मचारियों की नजरें इस जांच पर टिकी हुई हैं।