महराजगंज जनपद के विकास खण्ड मिठौरा में दर्ज एक आईजीआरएस शिकायत ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जांच की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। ग्राम सिंहपुर निवासी मनोज कुमार तिवारी द्वारा दिनांक 21 नवंबर 2025 को आईजीआरएस संदर्भ संख्या 80018725002081 के तहत उत्तम दास इंटरप्राइजेज एवं ओमप्रकाश पटेल इंटरप्राइजेज पर भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे। शिकायत का निस्तारण जिस तरीके से किया गया, वह अब स्वयं विवाद का विषय बन गया है।

सबसे अहम बात यह है कि इस शिकायत को बिना ठोस और पारदर्शी जांच के ही पोर्टल पर लगातार नौ बार निस्तारित नौ बार अस्वीकृत और नौ बार आख्या दिखाया गया। प्रत्येक बार शिकायतकर्ता को “अच्छा लगे” जैसी औपचारिक टिप्पणी के साथ संतोषजनक निस्तारण का दावा किया गया, जबकि जमीनी हकीकत और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच अपेक्षित थी।

खंड विकास अधिकारी मिठौरा द्वारा प्रस्तुत आख्या में यह उल्लेख किया गया कि सहायक विकास अधिकारियों एवं अवर अभियंता द्वारा स्थलीय सत्यापन किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि ओमप्रकाश पटेल इंटरप्राइजेज का कार्यालय उनके निजी आवास के एक कमरे में संचालित है और एक स्थान पर सीमेंट, गिट्टी व बालू पाई गई, जिसे गोदाम बताया गया। वहीं उत्तम दास इंटरप्राइजेज के बारे में यह कहा गया कि वर्तमान समय में न तो कार्यालय मिला और न ही कोई गोदाम, तथा कोई कार्य या सप्लाई नहीं हो रही है।

लेकिन शिकायतकर्ता और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह तथाकथित “स्थलीय सत्यापन” केवल औपचारिकता भर था। गंभीर सवाल यह उठता है कि शिकायत दर्ज होने और जांच अवधि के दौरान ही ओमप्रकाश पटेल इंटरप्राइजेज को घर पर कार्यालय दिखाने और बगल में पड़ी कुछ निर्माण सामग्री को दुकान/गोदाम के रूप में प्रस्तुत करने का पर्याप्त समय दे दिया गया। यदि यह सच है, तो यह जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सीधा आघात है।

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाली बात यह भी है कि जिन कार्यों को ओमप्रकाश पटेल इंटरप्राइजेज द्वारा कराए जाने का दावा किया गया, उनकी गुणवत्ता, प्रयुक्त सामग्री, मिट्टी, बालू, सीमेंट, गिट्टी आदि के मानकों पर कोई विश्लेषण, विवरण या तकनीकी जांच रिपोर्ट आख्या में शामिल नहीं की गई। न तो सामग्री की गुणवत्ता का उल्लेख है, न ही कार्यों के माप, मानक और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों का कोई स्वतंत्र परीक्षण दर्शाया गया है।
प्रशासन द्वारा यह निष्कर्ष निकाल देना कि “ओमप्रकाश पटेल इंटरप्राइजेज नियमानुसार कार्य कर रही है” जबकि गुणवत्ता, दरों, सप्लाई और वास्तविक कार्यस्थल की गहन जांच नहीं की गई, कई संदेहों को जन्म देता है। दूसरी ओर, उत्तम दास इंटरप्राइजेज को प्रथम दृष्टया कार्यरत न मानते हुए पूरे प्रकरण को ही निस्तारित कर देना शिकायतकर्ता के अनुसार एकतरफा कार्रवाई है।

यह मामला केवल दो फर्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आईजीआरएस जैसे महत्वपूर्ण जनसुनवाई तंत्र की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। यदि शिकायतें बिना समुचित जांच के बार-बार निस्तारित होती रहीं, तो आम नागरिक का भरोसा इस व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है।

अब जरूरत है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, जिसमें न केवल फर्मों के अस्तित्व बल्कि उनके द्वारा किए गए कार्यों की गुणवत्ता, सामग्री, भुगतान और अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष समीक्षा हो। तभी जनसुनवाई प्रणाली का उद्देश्य पूरा हो सकेगा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।